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आउट ऑफ पवेलियन: क्या उस तांत्रिक ने सचमुच मेसी के पैर बांध दिए थे?

अमिताभ श्रीवास्तव

-काबो वर्डे ने अर्जेंटीना को कड़ी टक्कर देकर साबित किया कि फुटबॉल में चमत्कार नहीं, अनुशासन, रणनीति और दमदार प्रदर्शन ही जीत की असली कुंजी हैं। तांत्रिक दावों की चर्चा रही, लेकिन मुकाबले का फैसला खिलाड़ियों के खेल ने किया।

-मिस्र के डिफेंडर मोहम्मद हानी एक ही विश्व कप में दो आत्मघाती गोल करने वाले पहले खिलाड़ी बन गए। इसके बावजूद मिस्र ने पेनल्टी शूटआउट में ऑस्ट्रेलिया को हराकर इतिहास रचा और क्वार्टर फाइनल में अर्जेंटीना से भिड़ने का टिकट हासिल किया।

मुश्किल से छह लाख आबादी वाले इस छोटे से देश क़ाबो वर्डे ने विश्वकप फुटबॉल में पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया था। नॉक आउट दौर तक बिना गोल किए और बिना गोल खाए वो अर्जेटीना से भिड़ रही थी। उस टीम से जिसके पास फुटबॉल का भगवान लियोनल मेसी था। मैसी को घाना के तांत्रिक नाना क्वाकू ने अपने काले जादू से बांधने का दावा किया था और जब पूरे मैच को देखा तो भले ही पहला गोल मेसी ने दागा हो, किंतु मेसी के पैरो का जादू फीका पड़ता दिखाई दिया। काबो वर्डे के बूढ़े गोलकीपर ने तो दुनिया में अपनी छाप छोड़ दी है। मेसी के लगभग पांच शक्तिशाली किक्स को उसने अपनी कलाबाजी से बेकार कर दी। अर्जेटीना की टीम को जीतने में पसीने ला दिए। मैच एकस्ट्रा टाइम तक गया और एक समय ऐसा लगने लगा था कि क़ाबो वर्डे मैच जीत जाएगी। और ऐसा हो भी जाता यदि बात पेनल्टी शूट तक जा पहुंचती। केवल कुछ मिनट की देरी थी इस शूट आउट तक पहुंचने में कि मेसी के ही एक लांग शूट को अपने हैडर से डिने बोरगेस ने गोल कर १११ वें मिनिट में ३-२ से बढ़त ली और जैसे-तैसे मैच जीत पाए। तांत्रिक नाना क्वाकू को लोग भले अन्धविश्वासी कहें मगर कई लोगो का मानना है कि मेसी जो अपना खेल नहीं खेल पाए वो उसीके जादू की वजह थी। मेसी ने पूरे मैच में करीब पांच किक ऐसी लगाई थी, जो गोल होनी ही थी मगर वोजिन्हा गोलकीपर जैसी सख्त दीवार को भेद नहीं पाए। जो हो पर यह बात भी सही है कि टोने टोटके से नहीं, बल्कि मैच अपनी खेल शक्ति से जीते जाते हैं।
एक ही विश्वकप में दो सुसाइड गोल
ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ फीफा विश्व कप के नॉकआउट मुकाबले में मिस्त्र के मोहम्मद हानी के नाम एक शर्मनाक रिकॉर्ड दर्ज हो गया है। मोहम्मद हानी एक ही विश्व कप में दो आत्मघाती गोल करने वाले दुनिया के पहले खिलाड़ी बन गए हैं। मिस्र के डिफेंडर मोहम्मद हानी एक ही टूर्नामेंट में दो आत्मघाती गोल करने वाले विश्व कप के इतिहास के पहले खिलाड़ी बन गए। ऑस्ट्रेलिया के मिडफील्डर एडेन ओ नील की ५५वें मिनट में लगाई गई फ्रीकिक पर गेंद हानी के सिर से टकराकर मिस्र के गोल के भीतर ही चली गई। इससे पहले ऑस्ट्रेलियाई मिडफील्डर कोनोर मेटकाफे से टकराने के कारण हानी को मेडिकल मदद लेनी पड़ी थी। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मैच से पहले मोहम्मद हानी ने बेल्जियम के खिलाफ ग्रुप चरण में १-१ से ड्रॉ रहे मैच में भी उन्होंने आत्मघाती गोल किया था। हालांकि, इसके बावजूद मिस्त्र ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मैच में पेनल्टी शूटआउट में जीत हासिल की। शूटआउट में मिस्त्र के लिए होसाम अब्दुलमागुद निर्णायक गोल किया। मैच में निर्धारित समय तक स्कोर १-१ से बराबर था। मिस्र ने चौथी बार विश्व कप खेलते हुए यह जीत दर्ज की है। वहीं ऑस्ट्रेलिया नॉकआउट में तीन में से एक भी बार जीत नहीं सका है। अब मिस्र का सामना मंगलवार को गत चैंपियन अर्जेंटीना से होगा।

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