मुख्यपृष्ठस्तंभसोमाली के समुद्री डकैत

सोमाली के समुद्री डकैत

-पाइरेट्स ऑफ द गल्फ ऑफ अदन

संतोषी रावत

अदन की खाड़ी का खौफनाक सन्नाटा…
बुधवार १ जुलाई २०२६ की काली रात। अदन की खाड़ी के बेहद खतरनाक और अशांत पानी को चीरता हुआ कमर्शियल जहाज ‘एमवी गोल्डन आर्सेनल’ अपनी धुन में आगे बढ़ रहा था। अचानक, समुद्र की लहरों को चीरती हुई डाकुओं की नावें तेजी से जहाज की तरफ बढ़ीं। हाथों में आधुनिक हथियार, चेहरों पर खूंखार इरादे और मकसद, जहाज को बंधक बनाना। जहाज पर सवार एक भारतीय क्रू मेंबर सहित पूरे स्टाफ की सांसें थम गईं। मौत सामने देख उन्होंने बिना वक्त गंवाए एंटी-पायरेसी प्रोटोकॉल एक्टिवेट किया और खुद को एक सिटाडेल ‘सुरक्षित कमरे’ में लॉक कर लिया। वहीं से कांपते हाथों से एक डिस्ट्रेस कॉल यानी आपातकालीन संदेश हवा में तैर गया।
संकटमोचक भारतीय नौसेना
इधर समंदर में डाकू जहाज पर कब्जा करने की कोशिश कर रहे थे, उधर हवा में तैर रहे उस डिस्ट्रेस कॉल को इलाके में गश्त कर रहे भारतीय नौसेना के घातक युद्धपोत आईएनएस त्रिकंड ने लपक लिया। संदेश मिलते ही युद्धपोत के इंजन दहाड़ उठे। आईएनएस त्रिकंड पूरी रफ्तार से समंदर का सीना चीरते हुए ‘एमवी गोल्डन आर्सेनल’ की तरफ दौड़ पड़ा।
जैसे ही डाकुओं के रडार पर भारतीय नौसेना की दहाड़ती हुई मौजूदगी दर्ज हुई, उनके होश उड़ गए। समंदर के उन बेरहम लुटेरों को अच्छी तरह पता था कि भारतीय नौसेना से टकराने का अंजाम क्या होता है। आईएनएस त्रिकंड को पास आता देख डाकुओं के हौसले पस्त हो गए और वे जहाज पर पूरी तरह कब्जा करने से पहले ही उल्टे पांव, दुम दबाकर भाग खड़े हुए।
मार्कोस कमांडोज का एक्शन
डाकुओं के भागते ही आसमान से भारतीय नौसेना के जांबाज मरीन कमांडो मार्कोस काल बनकर जहाज पर उतरे। हाथों में बंदूकें और आंखों में अंगारे लिए कमांडोज ने तुरंत मोर्चा संभाला।
मार्कोस ने पूरे जहाज का एक-एक कोना छान लिया। जब कमांडोज ने सुनिश्चित कर लिया कि कोई खतरा नहीं बचा है, तब डरे-सहमे क्रू को सुरक्षित बाहर निकाला गया। गनीमत रही कि नौसेना की मुस्तैदी से न तो किसी क्रू मेंबर को खरोंच आई और न ही जहाज को कोई नुकसान पहुंचा।
वैसे फिल्मों में भले ही ‘पाइरेट्स
ऑफ द कैरेबियन’ का जलवा हो, लेकिन अदन की खाड़ी और ‘हॉर्न ऑफ अफ्रीका’ के पास सक्रिय ये सोमाली डाकू असल दुनिया के सबसे खतरनाक और आधुनिक हथियारों से लैस लुटेरे माने जाते हैं। हालांकि, भारतीय नौसेना और मार्कोस कमांडोज के सामने इनकी एक नहीं चलती और वहां इनका नाम सिर्फ ‘पायरेट्स ऑफ द नौसेना का खौफ’ ही रह जाता है!

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