सुरेश गोलानी
शहर में धड़ल्ले से चल रहे हुक्का पार्लर, जहां रातभर तंबाकू मिश्रित हुक्का परोसा जाता है, न केवल युवाओं को बल्कि पूरे समाज को विनाश की ओर धकेल रहे हैं। मीरा‑भायंदर में स्थित हुक्का पार्लरों में लगातार ग्राहकों को नशे की खुराक दी जा रही है। स्कूल‑कॉलेज के मासूम छात्र‑छात्राएं इस नशे की चपेट में आ रहे हैं, जो माता‑पिताओं के लिए बड़ी चुनौती है।
एक वर्ग ऐसा भी है जो लाउंज और वैâफे में हुक्का व अन्य मादक पदार्थों को लाइफस्टाइल का हिस्सा मानता है। हाल ही में पुलिस ने मीरा रोड के पॉश इलाके में स्थित एक लाउंज पर रात ३ बजे छापा मारा और बड़ी संख्या में युवकों को तंबाकू मिश्रित हुक्का पीते हुए पकड़ा। हालांकि, इस प्रकार के मामलों में मालिक व व्यवस्थापक को गिरफ्तार किया जाता है, पर सख्त कानून न होने के कारण नशे के कारोबारी आसानी से बच निकलते हैं।
वर्तमान में पुलिस और प्रशासन के पास केवल ‘सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पाद (विज्ञापन का निषेध तथा व्यापार और वाणिज्य, उत्पादन, आपूर्ति और वितरण का विनियमन) अधिनियम (कोटपा) २००३’ के तहत कार्रवाई का अधिकार है। इस अधिनियम की धारा ४, २१ और २४ के तहत प्रकरण दर्ज कर जुर्माना (रु.४०० से रु.४,०००) लगाया जाता है, जो पर्याप्त नहीं है।
पिछले ३‑४ वर्षों में शहर में ५० से अधिक हुक्का पार्लर खुल चुके हैं, जो हर्बल फ्लेवर की आड़ में तंबाकू मिश्रित हुक्का और अन्य नशीले पदार्थ परोसते हैं। कम उम्र के युवक‑युवतियों में इन पार्लरों का क्रेज बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा कार्रवाई नाकाफी है, मनपा, खाद्य‑औषधि प्रशासन और पुलिस को मिलकर नशे के सौदागरों को जड़ से उखाड़ फेंकने के लिए अभियान चलाना चाहिए। साथ ही, सरकार को मौजूदा कानून में संशोधन कर इसे और अधिक सशक्त बनाना आवश्यक है। युवा किसी भी राष्ट्र की रीढ़ होते हैं, यदि वे नशे की बेड़ियों में बंध जाएं तो विकास केवल कागजों तक सीमित रह जाएगा।
