सगीर अंसारी
टैगोर नगर निवासियों की ५३ साल से ‘दो गज जमीन’ की मांग केवल एक भू‑संपदा का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह मानवता, धार्मिक संवेदनशीलता और प्रशासनिक जवाबदेही का भी है। जब एक समुदाय को अपने मृतकों को सम्मानजनक रूप से दफनाने के लिए १५ किमी दूर जाना पड़ता है और वहां भी पुरानी कब्रें बार‑बार खोदकर लाशें दफन की जाती हैं तो यह साफ संकेत है कि स्थानीय प्रशासकीय व्यवस्था में कुछ बुनियादी खामियां हैं, जिन्हें नजरअंदाज किया जा रहा है।
मुद्दा
विक्रोली के टैगोर नगर में लगभग ८ लाख लोग रहते हैं। यह इलाका मुंबई के उत्तर‑पूर्वी उपनगरों में सबसे घनी आबादी वाले क्षेत्रों में से एक है। १९७० के दशक में इस बस्ती की स्थापना के साथ ही स्थानीय निवासियों ने एक स्थायी कब्रिस्तान की मांग की थी, क्योंकि उस समय यहां कोई कब्रिस्तान नहीं था। एक लंबे अरसे से लगातार कोशिशों के बावजूद आज तक टैगोर नगर में कोई स्थायी कब्रिस्तान नहीं बना।
मौजूदा हालात: घाटकोपर की ‘रिवॉल्विंग डोर’। वर्तमान में टैगोर नगर के निवासियों को अपने मृत परिजनों को घाटकोपर कब्रिस्तान (लगभग १५ किमी दूर) ले जाना पड़ता है। घाटकोपर में जगह की कमी के कारण कब्रें ४‑६ माह में ही पुन: खोदी जाती हैं।
कब्रों की कमी- हर ५‑६ माह में पुरानी कब्रें खोदकर लाशें दफन की जाती है।
अमानवीय दृश्य- खोदने के दौरान अक्सर हड्डियों के टुकड़े बाहर निकलते हैं, जिससे शोकाकुल परिवारों की धार्मिक व भावनात्मक पीड़ा बढ़ती है। मनपा के नियमानुसार, एक मृत शरीर को पूरी तरह मिट्टी में बदलने में कम से कम १८ माह लगते हैं। वास्तविकता इसके उलट है, जिससे न केवल धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचती है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं की भी घोर अवहेलना होती है।
नाम न बताने की शर्त पर एक अधिकारी का कहना है कि हमारे पास सीमित बजट है, परंतु इस मुद्दे को प्राथमिकता देना आवश्यक है। इन बयानों से स्पष्ट है कि स्थानीय लोग केवल जमीन नहीं, बल्कि मानवाधिकार, धार्मिक सम्मान और प्रशासनिक जवाबदेही की मांग कर रहे हैं।
सामाजिक व कानूनी पहलू
संवैधानिक अधिकार- भारतीय संविधान के अनुच्छेद २१ के तहत जीवन के अधिकार में ‘स्वस्थ व सुरक्षित वातावरण’ शामिल है, जिसमें मृतकों के सम्मानजनक दफनाने का अधिकार भी सम्मिलित माना जा सकता है।
मानवाधिकार आयोग- इस मुद्दे को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के समक्ष उठाया गया है, जहां शिकायत दर्ज कर ली गई है।
सार्वजनिक हित याचिका– स्थानीय नागरिक समूह ने उच्च न्यायालय में दायर कर, मनपा को स्थायी कब्रिस्तान स्थापित करने का निर्देश देने की मांग की है।
स्थानीय आवाजें
‘हम ५३ साल से इंतजार कर रहे हैं। अब और नहीं सहन करेंगे, बड़े स्तर पर आंदोलन करेंगे।’
– अनवर शेख, सामाजिक कार्यकर्ता
