-चुनावी सभा में मोबाइल पर मंजूर करवा रहे हैं बड़ी-बड़ी परियोजनाएं
-जनप्रतिनिधित्व कानून की धारा १२३ व १२६ के तहत हो सकती है कार्रवाई
सामना संवाददाता / मुंबई
नगरपालिका चुनाव प्रचार में उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे का ‘फोन शो’ अब सियासी बवाल का बड़ा कारण बन गया है। मंच से ही वे एमआईडीसी और बांध जैसी परियोजनाएं चुनावी सभाओं के दौरान फोन पर मंजूर करवाने का दिखावा कर रहे हैं। देखा जाए तो जनप्रतिनिधित्व कानून की धारा १२३ व १२६ के तहत यह गुनाह है और उनके ऊपर कार्रवाई हो सकती है। मगर शिंदे के इस फोन शो पर चुनाव आयोग ने चुप्पी साध रखी है।
बता दें कि शिंदे अब अस्पतालों के लिए सोनोग्राफी और एमआरआई मशीनें उपलब्ध कराने की मांग भी लाइव कॉल के जरिए सभाओं में कर रहे हैं। हर सभा में मंत्रियों को माइक पर कॉल लगाकर तात्कालिक मंजूरी दिलाने का यह पूरा पैटर्न विपक्ष ही नहीं, बल्कि महायुति के मित्र दलों को भी खटकने लगा है। आरोप है कि यह सीधा-सीधा प्रचार का ‘नाटकीय मॉडल’ है, जहां काम करने की क्षमता से ज्यादा फोन पर दिखाए जाने वाले प्रदर्शन को महत्व दिया जा रहा है। एकनाथ शिंदे ने इस चुनाव में एक नया फॉर्मूला लाया है। वे भरी सभा में मंत्रियों को फोन लगाकर मतदाताओं पर ‘जादू’ करने की कोशिश कर रहे हैं। पहला फोन उन्होंने २६ नवंबर को यवतमाल के पांढरकवडा स्थित सभा में उद्योग मंत्री उदय सामंत को लगाया था। उन्होंने वहां लोगों को एमआईडीसी का आश्वासन दिया। इसके बाद उसी दिन वणी की सभा में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष सिद्धेश कदम को फोन लगाकर कहा कि यहां कोयले की वजह से हवा और पानी दूषित हो रहे हैं, जिस पर तत्काल कार्रवाई का आदेश दें। शेवगाव में पानी की आपूर्ति योजना के लिए जल आपूर्ति मंत्री गुलाब पाटील को फोन लगाया। मंत्री पाटील ने भी आचार संहिता के बाद काम होने का आश्वासन दिया।
सुषमा अंधारे ने कसा तंज
शिंदे द्वारा भरी सभा में मंत्रियों को लगाए जा रहे फोन पर शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) पक्ष की उपनेता सुषमा अंधारे ने भी तंज कसते हुए कहा कि हमें शिंदे और उदय सामंत जैसे फोन पर झूठ बोलने की जरूरत नहीं है।
शिंदे पैटर्न यानी नाटक
शिंदे के इस पैटर्न पर विरोधियों के साथ-साथ उनके मित्र दलों की ओर से भी आलोचना शुरू हो गई है। संगमनेर में एमआईडीसी मंजूरी के शिंदे के फोन पैटर्न पर थोरात ने जमकर हमला बोलते हुए कहा कि चुनाव में नाटक करने की इन्हें आदत हो गई है, लेकिन अब ऐसा नहीं चलेगा।
