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नकली थाना, नकली वर्दी … भायंदर में डिजिटल अरेस्ट का एक और सनसनीखेज मामला आया सामने …आतंकी फंडिंग का आरोप लगाकर बुजुर्ग के साथ ८४ लाख की ठगी

सुरेश गोलानी / मुंबई
डिजिटल अरेस्ट का एक और चौंका देने वाला मामला भायंदर से सामने आया है। भायंदर पश्चिम स्थित ६० फुट रोड इलाके में रहने वाले ७१ वर्षीय बुजुर्ग को पुलिस की वर्दी पहने साइबर ठगों ने वीडियो कॉल के जरिए नकली थाना दिखाया और ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर बेवकूफ बनाकर महज चार दिनों के भीतर ८४ लाख रुपए ठग लिए।
भायंदर पुलिस थाने में २८ नवंबर को दर्ज एफआईआर में शिकायतकर्ता ने अपने बयान में कहा कि उन्हें ७ नवंबर २०२५ को एक अनजान नंबर से वीडियो कॉल आया। पुलिस की वर्दी पहने हुए कॉलर ने खुद को नासिक पुलिस मुख्यालय का अधिकारी बताते हुए शिकायतकर्ता पर आतंकी फंडिंग करने का गंभीर आरोप लगाया। ठग ने शिकायतकर्ता को डराने और वह असली अधिकारी है, ये यकीन दिलाने के लिए नकली थाने का पूरा सेट-अप वीडियो कॉल में दिखाया और आतंकियों से जान का खतरा बताकर हर दो घंटे में अपने सुरक्षित होने का मैसेज भेजने को कहा। तीन दिनों तक ये सिलसिला चलता रहा जिसके बाद १० नवंबर को उसके खिलाफ मामला दर्ज होने की जानकारी देते हुए वीडियो कॉल के माध्यम से एफआईआर की कॉपी और अन्य दस्तावेज भी दिखाए। फर्जी पुलिस ने वीडियो कॉल पर ही पूछताछ के नाम पर शिकायतकर्ता के बैंक खातों और उसमें जमा राशि की जानकारी हासिल कर ली। ठगों ने बुजुर्ग को एक बैंक एकाउंट नंबर दिया और सारी राशि उसमें ट्रांसफर करने के निर्देश दिए। डर के मारे बुजुर्ग ने उसके कहने पर अपने खाते से ८४ लाख रुपए रियल टाइम ग्रॉस सेटलमेंट (आरटीजीएस) के माध्यम से ट्रांसफर कर दिए। बुजुर्ग ने जब यह घटना अपने एक पारिवारिक मित्र को बताई तब उसे समझ आया कि उसके साथ प्रâॉड हुआ है। बुजुर्ग द्वारा शिकायत प्राप्त होते ही भायंदर पुलिस ने अज्ञात ठगों और बैंक खाताधारकों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। आगे की जांच जारी है। मीरा भायंदर-वसई विरार पुलिस ने नागरिकों को इस तरह की ठगी से सावधान रहने का आवाहन करते हुए जानकारी दी कि डिजिटल अरेस्ट नामक कोई प्रक्रिया अस्तित्व में नहीं है और देश की कोई भी जांच एजेंसी इस तरह की कार्रवाई नहीं करती। अगर पुलिस को कोई करवाई करनी भी होगी तो वो फिजिकल रूप में करेगी, इसलिए इन साइबर ठगों द्वारा रचित डिजिटल अरेस्ट के झांसे में न आएं।

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