– अभिजीत दीपके, राकेश टिकैत, प्रकाश राज समेत दिग्गज उतरेंगे मैदान में
– ‘हर हाथ में तिरंगा, हर गली में जंतर-मंतर’ का नारा
सामना संवाददाता / नई दिल्ली
देशभर में एसआईआर के खिलाफ आज विरोध की आवाज बुलंद होने जा रही है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने और लोकतंत्र की रक्षा की मांग को लेकर आंदोलनकारी आज यानी २३ अक्टूबर को सड़कों पर उतरेंगे। अभिजीत दीपके, राकेश टिवैâत और प्रकाश राज समेत कई दिग्गज इस हुंकार में शामिल होंगे। ‘हर हाथ में तिरंगा, हर गली में जंतर-मंतर’ के नारे के साथ देशव्यापी आंदोलन का आह्वान किया गया है।
सवाल सिर्फ मतदाता सूची का नहीं, बल्कि वोट की ताकत, चुनावी पारदर्शिता और लोकतांत्रिक अधिकारों का भी है। अब इस आंदोलन की गूंज सत्ता के गलियारों तक पहुंचाने की तैयारी है।
बता दें कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ देशभर में विरोध तेज हो रहा है। ‘पीपुल्स अगेंस्ट एसआईआर’ गठबंधन ने २३ अक्टूबर को देशव्यापी आंदोलन का आह्वान किया है। गठबंधन ने चुनाव आयोग पर निष्पक्षता खोने का आरोप लगाते हुए लोकतंत्र बचाने के लिए जनता से सड़कों पर उतरने की अपील की है। इस आंदोलन में अर्थशास्त्री डॉ. परकला प्रभाकर, अभिनेता प्रकाश राज, वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण, किसान नेता राकेश टिवैâत, अभिजीत दीपके, तुषार गांधी, नेहा बोरा, अंजलि भारद्वाज और आइशी घोष समेत कई प्रमुख हस्तियों के शामिल होने की बात कही गई है। गठबंधन ने मुख्य चुनाव आयुक्त को तत्काल पद से हटाने और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है। साथ ही एसआईआर रद्द करने, हटाए गए पात्र मतदाताओं के नाम दोबारा जोड़ने, चुनाव आयुक्त अधिनियम २०२३ में किए गए संशोधनों को वापस लेने और बैलेट पेपर से मतदान बहाल करने की मांग उठाई है। गठबंधन का दावा है कि एसआईआर के तहत करीब १३ करोड़ पात्र मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। संगठन ने नारा दिया है, ‘हर हाथ में तिरंगा, हर गली में जंतर-मंतर।’
परकला प्रभाकर भी मांगेंगे ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा
चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर राजनीतिक विवाद गहराता नजर आ रहा है। अब अर्थशास्त्री और राजनीतिक टिप्पणीकार परकला प्रभाकर की ओर से भी इस्तीफे की मांग उठने की चर्चा है। चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता, मतदाता सूची और आयोग की जवाबदेही को लेकर सवाल लगातार उठ रहे हैं। हालांकि, परकला प्रभाकर के आधिकारिक बयान की पुष्टि जरूरी है।
