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अब गलती मानने से क्या फायदा?..लोकतंत्र का हिसाब बिगाड़कर आयोग ने झाड़े हाथ!

-पीलीभीत में जीत के अंतर से ज्यादा मतदाता प्रविष्टियों में गड़बड़ी; जिम्मेदारी सिर्फ तीन कर्मचारियों की या पूरे चुनावी तंत्र की?

चुनाव बीत जाएं, परिणाम घोषित हो जाएं और उसके बाद निर्वाचन आयोग हजारों मतदाता प्रविष्टियों में गड़बड़ी स्वीकार कर ले, तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि अब इस स्वीकारोक्ति से मतदाताओं को क्या हासिल होगा? उत्तर प्रदेश के पीलीभीत विधानसभा क्षेत्र में १०,४७० मतदाता प्रविष्टियों में अनियमितताओं की पुष्टि ने चुनावी व्यवस्था को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
हैरान करने वाली बात यह है कि पिछले विधानसभा चुनाव में यहां जीत का अंतर सात हजार मतों से कम था, जबकि गलत प्रविष्टियों का आंकड़ा उससे कहीं अधिक है। हालांकि, इससे चुनाव परिणाम प्रभावित होने या फर्जी मतदान होने का निष्कर्ष नहीं निकलता। लेकिन क्या निर्वाचन आयोग केवल यही सफाई देकर अपनी जिम्मेदारी पूरी मान सकता है?
हैरान करने वाली बात यह है कि पिछले विधानसभा चुनाव में यहां जीत का अंतर सात हजार मतों से कम था, जबकि गलत प्रविष्टियों का आंकड़ा उससे कहीं अधिक है। हालांकि, इससे चुनाव परिणाम प्रभावित होने या फर्जी मतदान होने का निष्कर्ष नहीं निकलता। लेकिन क्या निर्वाचन आयोग केवल यही सफाई देकर अपनी जिम्मेदारी पूरी मान सकता है?

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