हिमांशु राज
बॉलीवुड अभिनेता राजकुमार राव ने हाल ही में फिल्म इंडस्ट्री के बदलते रुझानों पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि सिनेमा अब भावनाओं से ज्यादा आंकड़ों और एल्गोरिद्म पर निर्भर होता जा रहा है। एक कार्यक्रम में अपनी बात रखते हुए राजकुमार ने कहा कि आज फिल्मों के पीछे गणना और विश्लेषण हावी है, जबकि असली कला की पहचान दिल से कही गई कहानी में होती है।राजकुमार ने बताया कि जैसे थियेटर में कभी-कभी औसत फिल्में चल जाती हैं, वैसे ही स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स पर भी कई बार कमजोर फिल्मों को अप्रत्याशित सफलता मिल जाती है। उन्होंने कहा, “कई बेहतरीन फिल्में दर्शकों तक नहीं पहुंच पातीं, जबकि कुछ औसत फिल्में खूब देखी जाती हैं। यह सब डेटा और एल्गोरिद्म का खेल है, जिसे शायद कोई पूरी तरह समझ नहीं पाता।”अभिनेता ने पुराने दौर के फिल्मकारों का उदाहरण देते हुए कहा कि फ्रांसिस फोर्ड कोपोला हों या मनमोहन देसाई, उन्होंने कभी दर्शकों के विश्लेषण पर भरोसा नहीं किया। वे बस अपनी कहानी को सच्चाई और जुनून से कहते थे। राव ने कन्नड़ फिल्म ‘कांतारा’ की भी तारीफ करते हुए कहा कि निर्देशक ऋषभ शेट्टी ने बिना किसी व्यावसायिक चिंता के अपनी आस्था से प्रेरित कहानी सुनाई और वही उसकी सबसे बड़ी ताकत बनी।राजकुमार का मानना है कि आज के दौर में अच्छे कलाकारों और मौलिक कहानियों की कमी महसूस होती है। उन्होंने कहा कि डेटा या ट्रेंड नहीं, बल्कि दिल से कही गई कहानी ही दर्शकों को छूती है। उनका संदेश साफ है—सिनेमा का भविष्य तकनीक से नहीं, बल्कि सच्चाई और संवेदना से तय होगा।
