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मोदी के विकास की खुली पोल … आईएमएफ ने दिया हिंदुस्थान को ‘सी’ ग्रेड!

-जीडीपी के आंकड़ों पर उठे सवाल
-कांग्रेस ने सरकार को लिया आड़े हाथ
सामना संवाददाता / नई दिल्ली
मोदी सरकार का दावा है कि देश ने सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था के रूप में अपनी स्थिति को मजबूत किया है। हालांकि, आईएमएफ ने मोदी सरकार के दावों की पोल खोल दी है। एक तरफ जब भारत ने अपना अनुमानित सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) ७.३ ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर बताया है तो दूसरी तरफ अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने अपनी ताजा रिपोर्ट में भारत के जीडीपी और नेशनल एकाउंट्स यानी आंकड़ों की गुणवत्ता को ‘सी’ रेटिंग दी है। इसके बाद अब ये बहस छिड़ गई है कि जब जीडीपी के आंकड़े विकास की तरफ इशारा कर रहे हैं तो आईएमएफ ने सी रेटिंग क्यों दी? पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने एक्स पर पोस्ट कर केंद्र सरकार से सवाल किया था कि वो बताए कि आईएमएफ ने अपनी सालाना समीक्षा में भारत के राष्ट्रीय एकाउंट्स स्टैटिस्टिक्स को सी ग्रेड में क्यों रखा है।
रिपोर्ट में क्या है?
२६ नवंबर को आईएमएफ ने भारत को लेकर एक रिपोर्ट जारी की। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि निगरानी के लिए पर्याप्त डेटा न होने के कारण भारत को सी ग्रेड दिया गया है। दरअसल आईएमएफ उसे उपलब्ध कराए गए डेटा को चार वर्गों में यानी ग्रेड्स में बांटता है। पहला, निगरानी के लिए पर्याप्त डेटा यानी ए ग्रेड; दूसरा, डेटा में कुछ कमियां हैं, लेकिन समग्र रूप से ये निगरानी के लिए पर्याप्त हैं; तीसरा, डेटा में कुछ कमियां हैं और चौथा- डेटा में गंभीर कमियां हैं, जो निगरानी को काफी हद तक बाधित करती हैं।

पिछले साल भी मिला था यही ग्रेड
कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने सोशल मीडिया पर लिखा, ‘आईएमएफ का कहना है कि भारत के नेशनल एकाउंट्स और इनफ्लेशन के आंकड़े अनौपचारिक क्षेत्र और लोगों के खर्च करने के पैटर्न जैसे प्रमुख पहलुओं को नहीं दर्शाते हैं।’ उनका कहना है कि ‘भारत को पिछले साल भी आईएमएफ ने सी ग्रेड ही दिया था, फिर भी कुछ नहीं बदला।’ वहीं बीजेपी आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने सफाई देते हुए एक्स पर लिखा है कि आईएमएफ की रेटिंग कई सालों से बदली नहीं है और तकनीकी मापदंडों से ये सालों से ‘सी’ है, न कि जीडीपी के आंकड़े फर्जी हैं।

कांग्रेस ने सरकार को घेरा
कांग्रेस ने इसे लेकर सरकार को घेरा है तो वहीं कांग्रेस के आरोपों का जवाब देते हुए बीजेपी ने कहा है कि इस मुद्दे की बुनियादी वजह २०११-१२ का आधार वर्ष है और कई सालों से तकनीकी मापदंडों की वजह से ये ग्रेड बदला नहीं है। कांग्रेस के संचार प्रभारी जयराम रमेश का कहना है, ‘ग्रॉस फिक्स्ड वैâपिटल फॉर्मेशन में कोई वृद्धि नहीं हुई है। निजी निवेश में किसी भी नई रफ्तार के बिना हाई जीडीपी की दर टिकाऊ नहीं है।’

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