-‘ड्रग इकॉनोमी’ का खामोश विस्फोट
-शहर की सबसे बड़ी चुनौती
जय सिंह
देश की आर्थिक राजधानी मुंबई आज एक ऐसे संकट से जूझ रही है, जो चुपचाप युवाओं के भविष्य को निगल रहा है। यह संकट है नशे की इकॉनोमी का। पुलिस की लगातार कार्रवाई, एनसीबी की छापेमारी और हाई-प्रोफाइल जब्तियां इन सबके बावजूद ड्रग्स का कारोबार शहर में और गहरा पैâलता जा रहा है। सरकारी आंकड़े साफ बताते हैं कि महाराष्ट्र में २०२४-२५ में नशीले पदार्थों की जब्ती अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच चुकी है और इस पूरे नेटवर्क का सबसे बड़ा निशाना है मुंबई।
मार्च २०२५ तक महाराष्ट्र पुलिस और एनसीबी ने संयुक्त रूप से ४,२४९.९० करोड़ रुपए के ड्रग्स जब्त किए और १४,२३० आरोपियों को गिरफ्तार किया। जुलाई २०२४ तक ही जब्ती ४,१३१ करोड़ रुपए पहुंच चुकी थी, जो २०२३ के मुकाबले ३६० प्रतिशत ज्यादा है। यानी कार्रवाई तेज है, लेकिन नशे का कारोबार उससे कई गुना तेजी से बढ़ रहा है।
पुलिस की कोशिशें, पर
क्या ये काफी हैं?
२०२४–२५ में मुंबई पुलिस ने
४०० से ज्यादा ऑपरेशन
१,२०० से अधिक गिरफ्तारियां
५०० करोड़ की जब्ती
क्लब–पब–रेव पार्टियों पर निगरानी
स्कूल–कॉलेजों में ‘से नो टू ड्रग्स’ अभियान
चला रखा है, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि मांग बढ़ रही है इसलिए सप्लाई नए रास्ते ढूंढ़ लेती है।
निष्कर्ष
मुंबई में बढ़ती ड्रग इकॉनोमी केवल कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं, युवा पीढ़ी के भविष्य पर हमला है।
अगर इसको को अभी नहीं रोका गया तो नशा न सिर्फ युवाओं, बल्कि मुंबई की सामाजिक संरचना को भी भीतर से तोड़ देगा।
सबसे ज्यादा खतरे में युवा पीढ़ी
मुंबई पुलिस की एंटी-नॉरकोटिक्स सेल की रिपोर्ट कहती है
इंस्टाग्राम, स्नैपचैट, व्हाट्सऐप पर कोडवर्ड में डील
पी.जी., हॉस्टल, कॉलेज और नए छात्रों पर विशेष फोकस
एमडी, एलएसडी और मेथ जैसी सिंथेटिक ड्रग्स का तेज प्रसार
‘क्यूरीसिटी टू एडिक्शन’- यानी शौक से शुरुआत, लत पर अंत
हैरानी की बात यह है कि कई डीलर भी १७–२२ वर्ष के हैं, जिन्हें बड़े गैंग ‘वैâरीयर’ बनाकर इस्तेमाल कर रहे हैं। पंजाब-राजस्थान-हरियाणा के गैंग, दक्षिण भारत का ‘केमिकल रूट’, नाइजीरियन कार्टेल, ‘डी’ कंपनी और स्थानीय पेडलर- सभी मिलकर शहर को ड्रग्स का ट्रांजिट + कंजंप्शन हब बना रहे हैं।
मुंबई ‘हाई वैल्यू हब’ क्यों?
मुंबई के पोर्ट, समुद्री तट, विदेशी कनेक्शन, रेव कल्चर और उच्च क्रय शक्ति- इन सब वजहों ने शहर को अंतर्राष्ट्रीय सिंडिकेट्स का हॉटस्पॉट बना दिया है। २०२४-२५ में कई बड़ी कार्रवाई हुईं, जिनमें मुंबई पुलिस ने गुप्त पैâक्ट्री पकड़ी, जिसकी क्षमता १२,००० करोड़ रुपए की मेथ / सिंथेटिक ड्रग्स बनाने की थी। यह मुंबई पुलिस के इतिहास की सबसे बड़ी कार्रवाई मानी गई।
सिर्फ २०२४ की पहली तिमाही (जनवरी–मार्च में ३०३ करोड़ रुपए का ड्रग्स बरामद कियास गया। मार्च २०२५ तक यह संख्या ५१३ करोड़ रुपए पहुंच गई। सवाल यह है कि जब पकड़ी गई मात्रा इतनी है तो असली बाजार में कितनी सप्लाई बचती होगी?
