-तुकाराम मुंढे ने एफएसएसएआई की कार्यप्रणाली को दी
चुनौती; मिलावटखोरों पर कार्रवाई का अधिकार किसके पास?
सामना संवाददाता / मुंबई
महाराष्ट्र में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और मिलावट की जांच को लेकर केंद्र तथा राज्य के बीच अधिकारों का विवाद बॉम्बे हाई कोर्ट पहुंच गया है। राज्य के खाद्य सुरक्षा आयुक्त तुकाराम मुंढे ने केंद्रीय खाद्य नियामक एफएसएसएआई की कार्यप्रणाली को चुनौती देते हुए याचिका दायर की है। उनका आरोप है कि केंद्रीय नियामक समानांतर व्यवस्था बनाकर राज्य के अधिकारियों के वैधानिक निरीक्षण अधिकारों को सीमित कर रहा है। यह विवाद केवल दो सरकारी संस्थाओं के अधिकार क्षेत्र तक सीमित नहीं है। इसका सीधा संबंध उन करोड़ों उपभोक्ताओं से है, जो रोज बाजार से दूध, तेल, मसाले, मिठाइयां और अन्य खाद्य पदार्थ खरीदते हैं।
सवाल उठता है कि यदि खाद्य पदार्थों की जांच करने वाली संस्थाएं ही अधिकारों के विवाद में उलझ जाएं, तो मिलावट रोकने की जिम्मेदारी कौन निभाएगा। किसी प्रतिष्ठान में अनियमितता मिलने पर कार्रवाई का अधिकार किसके पास होगा और जवाबदेही किसकी तय होगी? मुंढे की याचिका में केंद्रीय नियामक की व्यवस्था पर उठाए गए सवाल अभी न्यायिक परीक्षण के अधीन हैं। एफएसएसएआई का पक्ष और अदालत का अंतिम निर्णय भी महत्वपूर्ण होगा। खाद्य सुरक्षा व्यवस्था में केंद्र और राज्यों की भूमिकाएं कानून से निर्धारित होती हैं। ऐसे में विवाद का समाधान भी उसी कानूनी ढांचे में होना आवश्यक है। अब निगाहें हाई कोर्ट पर हैं। अदालत को तय करना होगा कि संबंधित संस्थाओं की शक्तियों की सीमाएं क्या हैं। इस बीच उपभोक्ताओं के लिए सबसे जरूरी सवाल वही है कि बाजार में बिकने वाला खाना सुरक्षित है या नहीं।
