-आरबीआई की चेतावनी,बिगड़ सकता है आम आदमी का बजट
सामना संवाददाता / नई दिल्ली
अर्थव्यवस्था की रफ्तार और विकास के आंकड़ों पर सरकार भले ही अपनी पीठ थपथपाए, लेकिन आम आदमी के लिए असली सवाल है रसोई का खर्च कितना बढ़ेगा? रिजर्व बैंक ने अक्टूबर के बुलेटिन में कमजोर मानसून, अल नीनो, भू-राजनीतिक तनाव और अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा कीमतों को आर्थिक विकास व महंगाई के लिए जोखिम बताया है। जब खाने-पीने की चीजों की कीमतों पर दबाव हो और ईंधन महंगा होने का खतरा मंडरा रहा हो, तब विकास के दावों के साथ जनता की जेब का हिसाब देना भी जरूरी है।
रिजर्व बैंक की चेतावनी अर्थव्यवस्था की चमकती तस्वीर के पीछे छिपे जोखिमों की ओर ध्यान खींचती है। अक्टूबर के बुलेटिन में आरबीआई ने कहा है कि खाद्य पदार्थों की आपूर्ति पर लगातार दबाव और वैश्विक ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव घरेलू महंगाई के लिए खतरा बने हुए हैं। कमजोर मानसून और मजबूत अल नीनो की स्थिति कृषि उत्पादन को प्रभावित कर सकती है। वहीं, पश्चिम एशिया में तनाव और अंतर्राष्ट्रीय बाजार में महंगे कच्चे तेल का असर परिवहन, उत्पादन और रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों तक पहुंच सकता है।
सितंबर २०२६ में खुदरा महंगाई दर बढ़कर लगभग ५.५ प्रतिशत पहुंच गई, जबकि अगस्त में यह करीब ४.८ प्रतिशत थी। यानी महंगाई का दबाव फिर बढ़ता दिखा। खाद्य वस्तुओं की कीमतों में तेजी का असर सबसे पहले उन परिवारों पर पड़ता है जिनकी कमाई का बड़ा हिस्सा राशन, सब्जियों, दालों और तेल पर खर्च होता है।
आरबीआई ने यह भी आगाह किया है कि वैश्विक तनाव, व्यापार में रुकावटें और अंतर्राष्ट्रीय जिंसों की बढ़ती कीमतें विकास की संभावनाओं को चोट पहुंचा सकती हैं।
