-धमकियों और खोखले वादों का फूटा गुब्बारा, सच साबित हुई गणेश नाईक की चुनौती
सामना संवाददाता / मुंबई
नई मुंबई में भाजपा के जोरदार वार ने शिंदे गुट की सियासत को धराशायी कर दिया। ‘तांगा पलटा, घोड़े भागे’ की तर्ज पर चले इस सत्ता संग्राम में खबर लिखे जाने तक भाजपा ६५ सीटों और धमकियों और खोखले वादों के सहारे मैदान में उतरा शिंदे गुट पीछे चल रहा था। इन नतीजों ने साफ कर दिया कि जनता ने सत्ता के घमंड को नकारते हुए शिंदे को जमीन दिखा दी।
नई मुंबई पर वर्चस्व पाने के लिए भाजपा और शिंदे गुट ने चुनाव से पहले पूरी ताकत झोंक दी थी। प्रचार के दौरान न सिर्फ राजनीतिक रणनीतियां, बल्कि व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप भी देखने को मिले। इसी दौरान उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और गणेश नाईक के बीच शब्दों की जंग और तीखी हो गई। शिंदे ने गणेश नाईक पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए तो जवाब में गणेश नाईक ने भी आक्रामक रुख अपनाते हुए शिंदे को खुली चुनौती दी। इस विवाद के चलते नई मुंबई का चुनाव केवल स्थानीय राजनीति तक सीमित न रहकर राज्य-स्तरीय चर्चा का विषय बन गया। गणेश नाईक द्वारा शिंदे पर लगाए गए आरोप बेहद गंभीर थे। नाईक ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि एकनाथ शिंदे के पास हराम का पैसा है और नई मुंबई के विकास के लिए मौजूद सिडको की जमीनें बेचकर भ्रष्टाचार किया गया। उन्होंने यह भी चुनौती दी थी कि अगर भाजपा का वरिष्ठ नेतृत्व कहे तो वे शिंदे का भ्रष्टाचार उजागर करेंगे और उनका ‘तांगा पलटकर, घोड़े फरार’ कर देंगे। चुनाव नतीजों के बाद भाजपा की बड़ी बढ़त को देखते हुए समर्थक कह रहे हैं कि नाईक की चुनौती सच साबित हुई है।
नाईक ने लोगों की समस्याएं सुलझाईं
गणेश नाईक के संदर्भ में संजीव नाईक ने कोविड काल का जिक्र किया। सत्ता में न होते हुए भी गणेश नाईक ने नागरिकों के काम किए, उनकी समस्याएं सुलझार्इं और इसी वजह से नई मुंबईकर मजबूती से उनके साथ खड़े रहे। पांच साल में सिर्फ दो घंटे शहर में आकर विकास करने की बात नहीं चल सकती। स्थानीय मुद्दे, लगातार संपर्क और काम की विश्वसनीयता के आधार पर जनता पैâसले करती है।
