सुरेश गोलानी / मुंबई
‘दोपहर का सामना’ में प्रमुखता से छपी खबर ‘जनता की जेब पर डाका, सेहत ‘भगवान भरोसे’!’ का बड़ा असर देखने को मिला है। मीरा-भायंदर शहर में पानी की किल्लत का फायदा उठाकर दोगुने दामों पर दूषित पानी बेचने वाले टैंकर माफियाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने हेतु प्रशासन ने आखिरकार अपनी कमर कस ली है। इस गंभीर मुद्दे का संज्ञान लेते हुए लोकप्रतिनिधियों, पुलिस और मीरा-भायंदर महानगरपालिका प्रशासन के अधिकारियों की शुक्रवार को एक उच्च स्तरीय बैठक संपन्न हुई, जिसमें अवैध पानी बेचने वाले माफियाओं के खिलाफ व्यापक मुहिम छेड़ने का निर्णय लिया गया। बैठक में तय हुआ कि शहर के कुछ हिस्सों में पैदा हुई पानी की किल्लत और उसके कारण पनपे बोरवेल के पानी की अनधिकृत (अवैध) बिक्री के काले बाजार के खिलाफ मनपा प्रशासन और पुलिस विभाग संयुक्त रूप से कड़ी कार्रवाई करेगा। अखबार में प्रमुखता से उजागर किया गया था कि कैसे नागरिकों से ४००-४५० रुपये की जगह ७००-७५० रुपये तक वसूल कर, बिना किसी जांच के दूषित पानी बेचा जा रहा था। इस लूट और स्वास्थ्य संकट पर गहरी चिंता जताते हुए लोकप्रतिनिधियों ने प्रशासन से मांग की है कि जिन क्षेत्रों में पानी की भारी किल्लत है, वहां मनपा तुरंत बोरवेल की वैकल्पिक व्यवस्था खड़ी करे। इससे नागरिकों को तत्काल राहत मिलेगी और माफियाओं का एकाधिकार पूरी तरह खत्म हो जाएगा। इस कड़े पैâसले के बाद से अवैध रूप से पानी की सप्लाई करने वाले कारोबारियों में हड़कंंप मच गया है। बैठक में सभी प्रतिनिधियों ने एक सुर में कहा कि पानी नागरिकों की बुनियादी जरूरत है।
