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ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष की ‘जन अदालत’बैठी!…खड़गे ने रखा प्रस्ताव, मीरा कुमार ने संभाली कमान

-एसआईआर और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर विपक्ष का विरोध तेज; राहुल-सोनिया सहित इंडिया गठबंधन के नेता शामिल
सामना संवाददाता / नई दिल्ली
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष ने शनिवार को दिल्ली में प्रतीकात्मक ‘जन महाभियोग’ आयोजित कर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर आयोजित इस कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने की। कांग्रेस नेता राहुल गांधी, सोनिया गांधी और इंडिया गठबंधन के अन्य नेता भी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में खड़गे ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रस्ताव प्रस्तुत किया। विपक्ष ने मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर की प्रक्रिया, कथित अनियमितताओं और आयोग की निष्पक्षता को लेकर अपनी आपत्तियां सामने रखीं। विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची पुनरीक्षण में पात्र नागरिकों के नाम हटने और शिकायतों के निस्तारण में पारदर्शिता की कमी जैसी समस्याएं सामने आई हैं। हालांकि इन आरोपों को न्यायिक रूप से सिद्ध तथ्य नहीं माना जा सकता। कार्यक्रम को सार्वजनिक रूप से प्रसारित किया गया, ताकि विपक्ष अपनी बात व्यापक जनसमूह तक पहुंचा सके। इस पूरे घटनाक्रम का महत्वपूर्ण पहलू यह है कि विपक्ष ने चुनाव आयोग के खिलाफ अपना राजनीतिक विरोध एक औपचारिक सुनवाई जैसी प्रक्रिया के माध्यम से प्रस्तुत किया। हालांकि प्रतीकात्मक ‘जन महाभियोग’से मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से नहीं हटाया जा सकता। उसके लिए संविधान में निर्धारित संसदीय प्रक्रिया आवश्यक है।
मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ छह आरोप!
विपक्ष ने ‘जन महाभियोग’में खोली अपनी चार्जशीट
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आयोजित प्रतीकात्मक ‘जन महाभियोग’में विपक्ष ने छह आरोपों का दस्तावेज प्रस्तुत कर चुनाव आयोग की जवाबदेही का मुद्दा उठाया।
इंडिया गठबंधन के नेताओं ने मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण, कथित गलत नाम हटाने, पात्र मतदाताओं को नोटिस जारी करने की प्रक्रिया और शिकायतों के समाधान को लेकर सवाल उठाए। विपक्ष का कहना है कि चुनाव आयोग को प्रत्येक विवादित निर्णय के पीछे मौजूद दस्तावेज, नियम और प्रशासनिक प्रक्रिया सार्वजनिक करनी चाहिए, ताकि मतदाताओं का भरोसा बना रहे। आयोग का पक्ष रहा है कि मतदाता सूची पुनरीक्षण का उद्देश्य मृत, स्थानांतरित, दोहरे पंजीकरण वाले और अन्य अपात्र नामों को हटाकर सूची को अद्यतन करना है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित करने के प्रयास में किसी पात्र नागरिक का मतदान अधिकार प्रभावित न हो, इसकी गारंटी कौन देगा?कानूनी दृष्टि से विपक्ष के आरोपों, चुनाव आयोग के आधिकारिक जवाबों और न्यायालय में प्रस्तुत रिकॉर्ड का अलग-अलग परीक्षण जरूरी है। जन अदालत में लगाए गए आरोप अपने आप में अपराध या संवैधानिक उल्लंघन सिद्ध नहीं करते।

 

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