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रे रोड पर पुल बना, यात्रियों के लिए रास्ता नहीं!.. पूर्वी दिशा में तीन रेल पटरियां पार करने की मजबूरी

सामना संवाददाता / मुंबई
मुंबई में पुलों और कनेक्टिविटी के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन पैदल यात्रियों की सुरक्षा का सवाल आते ही सरकारी एजेंसियों की जिम्मेदारी एक-दूसरे पर डालने की होड़ शुरू हो जाती है। रे रोड रेलवे स्टेशन इसका ताजा उदाहरण है। यहां नया रोड ओवरब्रिज (आरओबी) बनकर तैयार हो गया, लेकिन यात्रियों को स्टेशन तक पहुंचाने के लिए सुरक्षित पैदल रास्ता आज भी नदारद है। नतीजा यह है कि यात्रियों को ऊबड़-खाबड़ रास्तों, पत्थरों और झाड़ियों के बीच से गुजरने के साथ तीन रेल पटरियां पार करने का जोखिम उठाना पड़ रहा है।
प्राप्त जानकारी के मुताबिक, स्टेशन के दक्षिणी छोर पर स्थित एफओबी २०२२ से बंद पड़ा है। इसके चलते यात्रियों को दूसरे छोर तक लंबा चक्कर लगाना पड़ता है। पूर्वी दिशा से आने-जाने वालों की परेशानी इससे भी गंभीर है। यहां न तो व्यवस्थित सीढ़ियां हैं और न ही पैदल चलने के लिए सुरक्षित रास्ता। यात्रियों को पुराने ढांचे पर चढ़कर संकरे हिस्से से नीचे उतरना और तीन रेल पटरियां पार करनी पड़ती हैं। पीक आवर्स में भीड़ बढ़ने पर भगदड़ जैसी स्थिति पैदा होने की आशंका जताई जा रही है। बुजुर्गों, महिलाओं और रात में सफर करने वालों की सुरक्षा पर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इस समस्या को लेकर प्रशासन पहले भी सवालों के घेरे में आ चुका है। नवंबर २०२२ में भी पूर्वी दिशा के असुरक्षित रास्ते और अंधेरे को लेकर मामला सामने आया था। मई २०२५ में नए केबल-स्टेड आरओबी के उद्घाटन के बाद भी स्टेशन से पैदल संपर्क नहीं होने का मुद्दा उठा था। यानी वर्षों से समस्या कायम है, लेकिन समाधान अब तक नहीं निकला। मामले में रेलवे और मनपा के बीच खर्च को लेकर भी खींचतान सामने आई है। मनपा के मुताबिक, एफओबी निर्माण का खर्च दोनों एजेंसियों को ५०-५० प्रतिशत उठाना था। इसके तहत मई २०२६ में मनपा ने अपने हिस्से के १०.८७ करोड़ रुपए मध्य रेलवे को देने की कोशिश की, लेकिन रेलवे ने राशि स्वीकार नहीं की।

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