-कांग्रेस ने केंद्र पर साधा निशाना
सामना संवाददाता / नई दिल्ली
केंद्र सरकार और भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) द्वारा आईडीबीआई बैंक में अपनी ६०.७२ प्रतिशत हिस्सेदारी कनाडाई कंपनी फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स को बेचने के फैसले पर विवाद गहराता जा रहा है। कांग्रेस पार्टी ने जी. गुरुमूर्ति महालिंगम की भूमिका को लेकर सरकार और एलआईसी से गंभीर सवाल पूछते हुए सौदे की पारदर्शिता पर उंगलियां उठाई हैं।
एक ही समय में दो परस्पर विरोधी भूमिकाएं
रिपोर्टों और कांग्रेस के बयानों के अनुसार, जी. गुरुमूर्ति महालिंगम को १९ दिसंबर २०२५ को फेयर फैक्स के नियंत्रण वाली कंपनी ‘थॉमस कुक इंडिया’ के बोर्ड में स्वतंत्र निदेशक नियुक्त किया गया था। उस समय वे एलआईसी के बोर्ड में स्वतंत्र निदेशक और उसकी शक्तिशाली ‘निवेश समिति’ के सदस्य भी थे। उल्लेखनीय है कि आईडीबीआई बैंक में बिकने जा रही कुल ६०.७२ प्रतिशत हिस्सेदारी में से ३०.२४ प्रतिशत हिस्सेदारी एलआईसी की ही थी।
राजनीतिक हमला और समय पर सवाल
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि महालिंगम के थॉमस कुक के बोर्ड में शामिल होने के महज २० दिनों बाद आईडीबीआई बैंक की अंतिम बोलियां आमंत्रित की गर्इं। जब फेयरफैक्स की ओर से बोली प्रक्रिया, आरक्षित मूल्य में बदलाव और संशोधित प्रस्ताव प्रस्तुत किए जा रहे थे, तब महालिंगम दोनों ही संस्थाओं में पद पर बने हुए थे। विपक्ष का कहना है कि विक्रेता संस्थान (एलआईसी) और खरीदार कंपनी (फेयरपैâक्स) दोनों से संबंध रखना ‘हितों के टकराव’ की श्रेणी में आता है।
पारदर्शिता की मांग
हालांकि, इस बात का कोई सार्वजनिक प्रमाण नहीं है कि महालिंगम ने प्रक्रिया को सीधे प्रभावित किया, लेकिन कांग्रेस ने सवाल उठाया है कि क्या उन्होंने खुद को एलआईसी की बैठकों से अलग रखा था या नहीं। विपक्ष ने इस मामले में जवाबदेही तय करने और निष्पक्ष जांच की मांग की है।
