मुख्यपृष्ठसमाचारसच्ची समरसता आएगी तब, जब सभी करेंगे योगदान- डॉ. संतोष अंश

सच्ची समरसता आएगी तब, जब सभी करेंगे योगदान- डॉ. संतोष अंश

– सरस्वती शिशु मंदिर में ‘समरसता संवाद’

सामना संवाददाता / सुल्तानपुर

यूपी के सुल्तानपुर शहर स्थित सरस्वती शिशु मंदिर इंटरमीडिएट कॉलेज, सिरवारा मार्ग में अंबेडकर जयंती के अवसर पर साप्ताहिक कार्यक्रमों के अंतर्गत ‘समरसता संवाद’ का आयोजन किया गया। जिसे संबोधित करते हुए अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के प्रांतीय उपाध्यक्ष डॉ. संतोष अंश ने विद्यार्थियों से कहा कि डॉ. अंबेडकर के विचार केवल इतिहास तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे वर्तमान समाज के मार्गदर्शक सिद्धांत हैं। सच्ची समरसता तभी संभव है जब समाज का प्रत्येक व्यक्ति समान अधिकार,समान अवसर और पारस्परिक सम्मान की भावना को अपनाए। शिक्षा ही वह सशक्त माध्यम है, जो व्यक्ति को जागरूक बनाकर उसे अपने अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति सजग करती है। डॉ. अंबेडकर ने शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन का सबसे प्रभावी साधन माना और उनके विचार आज भी युवाओं को न्याय, समता और बंधुत्व के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं। युवाओं को चाहिए कि वे अंबेडकर के विचारों को व्यवहार में उतारें और एक सशक्त, समतामूलक एवं एकजुट भारत के निर्माण में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें। इस अवसर पर विद्यालय के प्रधानाचार्य दयाराम पाल ने अपने उद्बोधन में कहा कि ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे डॉ. अंबेडकर के आदर्शों को अपने जीवन में आत्मसात करें। कार्यक्रम में परिषद के जिला संयोजक तेजस्व पाण्डेय ने अपने उद्बोधन में कहा कि डॉ. अंबेडकर का जीवन संघर्ष, आत्मसम्मान और सामाजिक न्याय का प्रतीक है। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित न रहें, बल्कि समाज में व्याप्त असमानताओं को समझते हुए उनके समाधान हेतु सक्रिय भूमिका निभाएं। उन्होंने कहा कि समरस समाज का निर्माण तभी संभव है, जब युवा वर्ग जाति, वर्ग और भेदभाव से ऊपर उठकर राष्ट्रहित को सर्वोपरि मानते हुए कार्य करे। कार्यक्रम में कार्यालय मंत्री शिखर पाठक एवं करण शाहू सहित अनेक विद्यार्थी उपस्थित रहे। अंत में सभी ने सामाजिक समरसता एवं राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ करने का संकल्प लिया।

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