अनिल तिवारी
अरे मियां साहब, भारतीय क्रिकेट की असली ताकत एआई ही है, एआई मतलब ऑल इंडियंस। छोटे शहरों से निकलते बच्चे, सालों की मेहनत, आईपीएल जैसा बड़ा मंच यही वह ‘तकनीक’ है जो भारतीय क्रिकेटरों को बड़ा बनाती है।
पाकिस्तान की क्रिकेट बहसों का अपना अलग ही विज्ञान है। वहां जब भारतीय गेंदबाज विकेट लें, तो गेंद अलग होती है। जब रोहित शर्मा टॉस जीतें, तो सिक्का संदिग्ध हो जाता है। जब भारत पाकिस्तान को हरा दे, तो मैदान में २२ पंडितों का जादू-टोना दिखाई देने लगता है। और अब जब वैभव सूर्यवंशी जैसे युवा बल्लेबाज ने राजस्थान रॉयल्स के लिए सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाफ शतक ठोक दिया, तो पाकिस्तान के क्रिकेट विशेषज्ञ नौमान नियाज को बल्ले में भी एआई नजर आ जाता है। नियाज साहब का आरोप है कि वैभव सूर्यवंशी के बल्ले में एआई लगा है, जो पावर पैदा कर रहा है। यानी अब तक हम नादान लोग समझते थे कि बल्लेबाज की टाइमिंग, अभ्यास, फिटनेस और प्रतिभा से चौके-छक्के लगते हैं। लेकिन पाकिस्तान की इस नई खोज ने बता दिया कि क्रिकेट अब बल्ले से नहीं, ‘बैटरी वाले बुद्धि-बल्ले’ से खेला जा रहा है।
कभी हसन रजा ने कहा था कि भारतीय गेंदबाजों को आईसीसी और बीसीसीआई अलग गेंद दे रहे हैं। मतलब गेंद में कुछ गड़बड़। सिकंदर बख्त को रोहित शर्मा के टॉस में साजिश दिखी। मतलब सिक्के में कुछ गड़बड़। पाकिस्तान की टीवी बहसों में दावा हुआ कि भारत की जीत के पीछे २२ पंडितों का जादू-टोना था। मतलब अब मंत्रों में भी मैच-फिक्सिंग खोज ली गई। वसीम अकरम को आईपीएल इतना लंबा लगा कि बच्चे बड़े हो गए। मतलब लीग में कुछ गड़बड़। शोएब अख्तर ने अभिषेक शर्मा की जगह अभिषेक बच्चन को मैदान में उतार दिया। मतलब नाम में कुछ गड़बड़। अब नौमान नियाज के हिसाब से बल्ले में भी गड़बड़। सवाल यह है कि अगर हर भारतीय प्रदर्शन के पीछे कोई मशीन, साजिश, मंत्र या जादू है, तो फिर पाकिस्तान की हार के पीछे क्या है? खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे ही न? अरे मियां साहब, भारतीय क्रिकेट की असली ताकत एआई ही है, एआई मतलब ऑल इंडियंस। और हां, यहां एकेडमी, इंप्रâास्ट्रक्चर और इंटेंट भी है। छोटे शहरों से निकलते बच्चे, सालों की मेहनत, आईपीएल जैसा बड़ा मंच और दबाव में खेलने की आदत, यही वह ‘तकनीक’ है जो भारतीय क्रिकेटरों को बड़ा बनाती है। मगर जिनके पास विश्लेषण कम और बहाने ज्यादा हों, उन्हें हर छक्के में चिप, हर विकेट में सेटिंग, हर टॉस में चाल और हर जीत में जादू-टोना दिखाई देता है।
वैभव सूर्यवंशी का बल्ला एआई से चलता है या नहीं, यह तो जांच का विषय पाकिस्तान की टीवी बहसों में रहेगा। लेकिन इतना तय है कि पाकिस्तान के कुछ विशेषज्ञों की कल्पनाशक्ति जरूर किसी सुपर-कंप्यूटर से कम नहीं। फर्क बस इतना है कि कंप्यूटर डेटा से निष्कर्ष निकालता है और ये लोग हार से हास्य निकालते हैं।
