एड. राजीव मिश्र
मुंबई
८० से लेकर ९० के बीच प्यार-मोहब्बत का गोल्डन पीरियड रहा। एक ओर सरकार के सर्वशिक्षा और साक्षरता अभियान का असर देश में दिख रहा था, दूसरी ओर रेडियो और टेलीविजन की दुनिया में क्रांति चल रही थी। सर्वशिक्षा और साक्षरता अभियान का असर यह हुआ कि गांव में नौजवानों के साथ-साथ बुजुर्ग भी पढ़ना-लिखना सीख गए। यह सरकार के लिए उपलब्धि रही, पर गांव-जवार में नया-नया प्यार करने वाले तोता-मैना के लिए साक्षरता मानो अभिशाप हो गई। पहले हर गांव में दो-चार लोग जो पढ़े-लिखे रहते थे, उनके ऊपर पूरे गांव की तार-चिट्ठी पढ़ने के साथ-साथ नए-नए प्रेमियों के प्रेम-पत्र लिखने का भार भी रहता था। इन पढ़े-लिखों में भी जो दिलफेंक टाइप के लोग होते थे, वे प्रेम-पत्र लिखने के एक्सपर्ट माने जाते थे। पूरे गांव में जिसे अपना प्रेम-पत्र लिखवाना होता, वह इन्हीं पढ़े-लिखे दिलफेंक लोगों से मान-मनुहार करके अपने दिल की बात अपने प्रेमी तक पहुंचाता था। गांव में इन्हीं लोगों को पता रहता था कि किसका लड़का किस लड़की के साथ गुपचुप क्या कर रहा है। इनमें से ज्यादातर एक्सपर्ट आजकल कवि हो गए हैं। ये एक्सपर्ट कभी-कभी घर के लोगों से हुए पुराने झगड़े की खुन्नस भी प्रेम-पत्र लिखते समय निकाल लेते थे और ऐसी चिट्ठी लिखते थे कि सेटिंग से पहले ही ब्रेकअप हो जाता था। अब ऐसी ही एक घटना प्रेम के साथ भी हो गई। अपने नाम के हिसाब से प्रेम जन्मजात प्रेमी व्यक्ति था। गांव की हमउम्र लड़कियां, नई भौजाई, किसी की साली-सरहज—कोई भी हो, उसे देखते ही प्रेम के मन में प्यार का बरगद झूमने लगता था।
एक बार प्रेम के पड़ोसी की साढ़ुआइन आई। उसे देखते ही प्रेम निहाल हो गया। एक-दो बार उसने उसे देखकर मुस्कुरा दिया। प्रेम बातों-बातों में गोलुआ के पास जा पहुंचा और अपने दिल की बात बताई। गोलुआ पुराना बदमाश था। एक पक्का कटहर लेने के बाद भी उसने चिट्ठी लिखना शुरू किया—‘हमार प्राण प्यारी गुलाबो’ से लेकर चार-पांच चलते शेर के साथ लव लेटर पूरा किया। पर बीच में एक जगह खेल कर गया और गुलाबो के साथ उसकी तीनों बहनों और दोनों भौजाइयों के लिए भी शाब्दिक प्रेम-प्रतिज्ञा कर दी। और वह लेटर गुलाबो की जगह पड़ोसी के हाथ लग गया। तब से वह पड़ोसी लाठी में तेल लगाकर प्रेम को ढूंढ रहा है और प्रेम भागा-भागा फिर रहा है।
