सूफी खान
मिडिल ईस्ट के बदलते हालात और जंग के दौरान बुरी तरह हुई पिटाई को देखते हुए यूएई ने ग्लोबल तेल संगठन ‘ओपेक’ से बाहर निकलने का चौंकाने वाला पैâसला किया है। संयुक्त अरब अमीरात का आरोप है कि गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल यानी जीसीसी देशों से उसे ईरान के हमलों के खिलाफ कोई मदद नहीं मिली। ऐसे में यूएई को बड़ा नुकसान हुआ, क्योंकि यूएई इजरायल का भी दोस्त है और अमेरिका का भी पार्टनर। यूएई चाहता था कि ईरान को सही से सबक सिखाया जाए, मगर खाड़ी देशों और मुस्लिम मुल्कों की अलग ही राजनीति चल रही थी। सऊदी ने पाकिस्तान के साथ डील कर ली, भले ही इस डील का कोई फायदा जंग के दौरान नहीं हुआ। जब ईरान सऊदी में अमेरिकी ठिकानों पर हमले को अंजाम दे रहा था, तो पाकिस्तान को ईरान के खिलाफ एक्शन लेना था, लेकिन पाकिस्तान ने इसके उलट अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाने का रास्ता चुना, जिसके कारण एकतरफा युद्धविराम हो गया। मिडिल ईस्ट में चल रही इस तरह की साजिशों से यूएई को बड़ा झटका लगा है और उसने ५९ साल बाद तेल उत्पादन करने वाले देशों के संगठन ओपेक से खुद को अलग कर लिया। एक्सपर्ट कहते हैं कि ऑर्गेनाइजेशन ऑफ द पेट्रोलियम एक्सपोर्टिंग कंट्रीज यानी ओपेक में ज्यादा दबदबा सऊदी अरब का चलता है। तेल के रेट का कंट्रोल ओपेक में सऊदी के हाथ में है। ऐसे में सऊदी उस रीजन में अहम हो जाता है। सऊदी सामने से तो इजरायल के साथ नहीं है, मगर यूएई खुलकर इजरायल के साथ है। इसके अलावा यूएई को यह भी समझ आ गया है कि अब चाहे होर्मुज जब भी खुलेगा, तो तेल के रेट बढ़ेंगे, उनके गिरने की संभावना अब कम ही है। अभी यूएई के कच्चे तेल का दैनिक उत्पादन लगभग ३० लाख बैरल है, जो आगे तेल के बढ़े दामों से कमाई के हिसाब से कम है। यही वजह है कि उसने ओपेक से खुद को अलग कर लिया। ओपेक छोड़ने के बाद यूएई अब किसी भी कोटे के प्रतिबंध के बिना अपनी पूरी क्षमता से तेल निकाल सकेगा। एक्सपर्ट कहते हैं कि सऊदी और यूएई में वैसे भी क्षेत्र में दबदबे की लड़ाई चल रही है। अमेरिका दोनों के साथ है। यूएई के साथ इजरायल भी है। यमन में दोनों आमने-सामने आ गए थे। उधर सूडान में वहां की अधिकृत सेना को सऊदी, तुर्की और अन्य देशों का समर्थन है। सूडान में सेना से लड़ रही वहां की पैरामिलिट्री फोर्स, जिसे आतंकी करार दिया गया है, उस पर आरोप है कि वह संगठन यूएई की मदद से लड़ रहा है। ऐसे में इलाके में अपनी एक मजबूत पहचान बनाने के लिए यूएई लगातार कोशिश कर रहा है और ओपेक के बंधन से निकलना उसका बोल्ड पैâसला माना जा रहा है।
