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दो साल बाद जागा सिस्टम …७० लाख यात्रियों की सुरक्षा के लिए अब सभी स्टेशनों का सेफ्टी ऑडिट

जेदवी / मुंबई
मुंबई की लाइफलाइन कही जाने वाली लोकल ट्रेन सेवाओं की सुरक्षा को लेकर आखिरकार प्रशासन की नींद टूटी है। करीब दो साल तक ठंडे बस्ते में पड़ी सुरक्षा समीक्षा बैठकों और अनदेखी के बाद अब सभी उपनगरीय रेलवे स्टेशनों का सेफ्टी ऑडिट कराने का पैâसला लिया गया है। सदानंद दाते ने निर्देश दिए हैं कि शहर के हर लोकल स्टेशन की सुरक्षा व्यवस्था का बारीकी से आकलन किया जाए। साथ ही लंबे समय से बंद पड़ी तिमाही सुरक्षा समीक्षा बैठकों को दोबारा शुरू करने का आदेश भी दिया गया है। सवाल यह है कि आखिर अब तक ये जरूरी बैठकें क्यों नहीं हो रही थीं? केंद्रीय गृह मंत्रालय के स्पष्ट दिशा-निर्देशों के बावजूद सुरक्षा व्यवस्था की नियमित समीक्षा न होना सिस्टम की बड़ी चूक को उजागर करता है। हाल ही में हुई उच्च स्तरीय बैठक में रेलवे, खुफिया एजेंसियों और एंटी टेररिज्म स्क्वाड के अधिकारियों ने जब सुरक्षा की परतें खंगालीं, तब कई खामियां सामने आईं। अब किए जाने वाले सुरक्षा ऑडिट में भीड़भाड़ वाले स्टेशनों को प्राथमिकता दी जाएगी। सीसीटीवी की स्थिति, प्रवेश-निकास व्यवस्था, भीड़ नियंत्रण और आपातकालीन प्रतिक्रिया जैसे अहम पहलुओं की जांच होगी। साथ ही ट्रेनों और संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा बलों की तैनाती की भी समीक्षा की जाएगी। गंभीर बात यह भी है कि अब तक गवर्नमेंट रेलवे पुलिस (जीआरपी) और रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स (आरपीएफ) के बीच समन्वय को लेकर सवाल उठते रहे हैं। अब बेहतर तालमेल की बात की जा रही है, ताकि आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई हो सके।

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