सुनील ओसवाल / मुंबई
महाराष्ट्र के सत्ता के सबसे बड़े केंद्र मंत्रालय में ही पेयजल की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मंत्रालय परिसर में दूषित पानी पीने के बाद कई सरकारी कर्मचारियों को उल्टियां और बेचैनी होने की घटना सामने आई है। प्रारंभिक जांच में पानी की टंकी में एक मरी हुई बिल्ली मिलने की बात सामने आते ही पूरे प्रशासनिक तंत्र में हड़कंप मच गया। सूत्रों के अनुसार, सोमवार को कुछ कर्मचारियों ने अचानक उल्टियां, जी मिचलाने और कमजोरी की शिकायत की। उन्हें तत्काल उपचार के लिए नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। डॉक्टरों ने प्राथमिक तौर पर फूड/वॉटर पॉइजनिंग की आशंका जताई। इसके बाद जब पानी की टंकियों की जांच की गई, तो एक टंकी में मृत बिल्ली पाए जाने की जानकारी सामने आई। यह घटना कई गंभीर सवाल खड़े करती है—क्या मंत्रालय जैसी संवेदनशील इमारत में पानी की टंकियों की नियमित सफाई होती है? क्या मेंटेनेंस और निगरानी के तय मानकों का पालन किया जा रहा है? अगर हां, तो फिर टंकी में जानवर वैâसे पहुंचा?
मंत्रालय प्रशासन ने फिलहाल टंकी को खाली कर सफाई और सैनिटाइजेशन का काम शुरू कर दिया है। साथ ही पानी के नमूने जांच के लिए भेजे गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि ‘जिम्मेदारों की पहचान कर कार्रवाई की जाएगी,’ लेकिन कर्मचारियों में नाराजगी साफ दिख रही है। कर्मचारी संगठनों ने इस घटना को ‘लापरवाही की पराकाष्ठा’ बताते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उनका कहना है कि अगर मंत्रालय में ही पीने का पानी सुरक्षित नहीं है, तो आम सरकारी दफ्तरों की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। इस घटना ने एक बार फिर सरकारी इमारतों में बुनियादी सुविधाओं की निगरानी और जवाबदेही पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।
