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महाराष्ट्र में ‘कुत्तों’ का कहर …रोज साढे पांच हजार लोग हो रहे शिकार!

– ३ महीनों में ५ लाख को काटा
– रेबीज से १९ लोगों की हुई मौतें
सामना संवाददाता / मुंबई
राज्य में कुत्तों के काटने की घटनाएं अब गंभीर जनस्वास्थ्य संकट का रूप लेती जा रही हैं। राज्य के सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग के चौंकाने वाले आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी से मार्च २०२६ के बीच डॉग बाइट के करीब ५ लाख (४,९९,५५३) मामले सामने आए हैं, जबकि १९ लोगों की मौत रेबीज जैसी घातक बीमारी से हो चुकी है। इस तरह देखा जाए तो रोज साढ़े पांच हजार लोगों को कुत्ते काट रहे हैं।
बता दें कि सबसे ज्यादा ९ मौतें पुणे में दर्ज की गई हैं, जबकि ठाणे में २ और मुंबई समेत चंद्रपुर, नागपुर, वर्धा, सांगली, सातारा और रायगढ़ में एक-एक मौत ने हालात की गंभीरता उजागर कर दी है। डॉक्टरों और विशेषज्ञों का साफ कहना है कि इस भयावह स्थिति के पीछे कई कारण जिम्मेदार हैं। राज्य में तेजी से बढ़ती आवारा कुत्तों की संख्या, खुले में फेंका जा रहा कचरा, जिससे उन्हें आसानी से भोजन मिल रहा है। प्रजनन काल में उनका आक्रामक व्यवहार और बेहतर रिपोर्टिंग सिस्टम के चलते मामलों का बढ़ा हुआ आंकड़ा। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि रेबीज एक जानलेवा बीमारी है, जो सीधे मस्तिष्क पर हमला करती है और समय पर इलाज न मिलने पर मौत तय मानी जाती है। गंभीर मामलों में तुरंत वैक्सीनेशन और रैबीज इम्युनोग्लोब्युलिन देना बेहद जरूरी होता है, लेकिन जागरूकता की कमी कई बार जान पर भारी पड़ रही है। स्वास्थ्य विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि कुत्ते के काटने को हल्के में न लें और तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में उपचार कराएं। साथ ही प्रशासन को भी सख्त कदम उठाने की जरूरत है। आवारा कुत्तों की संख्या पर नियंत्रण, कचरा प्रबंधन में सुधार और व्यापक जनजागरूकता अभियान अब वक्त की मांग बन चुके हैं। लगातार बढ़ते मामलों ने एक बार फिर राज्य की सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था और शहरी प्रबंधन की पोल खोल दी है।

 

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