अमिताभ श्रीवास्तव
अभी कुछ दिन पहले पाकिस्तानी क्रिकेट लीग के मैच में ड्रेसिंग रूम में इमाद वसिम नामक खिलाड़ी को बीड़ी पीते हुए पकड़ा गया था तो बड़ा हो हल्ला मचा था, मगर जब आईपीएल में पिछले दिनों राजस्थान रॉयल्स और पंजाब किंग्स के बीच हुए मुकाबले के दौरान राजस्थान के २४ वर्षीय कप्तान रियान पराग का एक वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ तो पता चला कि वो कथित तौर पर टीम के ड्रेसिंग रूम में `वेप’ का इस्तेमाल करते नजर आ रहे हैं। हैरानी भी हुई और शर्मनाक भी। यह घटना दूसरी पारी के १६वें ओवर की है, जब ब्रॉडकास्ट वैâमरे ने कुछ पलों के लिए पराग को वैâद किया। हैरानी की बात यह है कि यह फुटेज ठीक उसी समय सामने आई जब रियान पराग १६ गेंदों में २९ रन बनाकर आउट होकर पवेलियन लौटे थे। एक अहम मोड़ पर विकेट गंवाने के बाद ड्रेसिंग रूम से आई इस क्लिप ने पैंâस और क्रिकेट गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। मैच के बीच में कप्तान की इस हरकत ने खेल भावना और अनुशासन को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, वेप के इस्तेमाल के खिलाफ कोई स्पष्ट सार्वजनिक नियम नहीं है, लेकिन भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के पास स्टेडियमों के भीतर खिलाड़ियों के व्यवहार के लिए सख्त दिशा-निर्देश हैं। वेपिंग का अर्थ है ई-सिगरेट या वेप पेन जैसे बैटरी से चलने वाले उपकरणों का उपयोग करके निकोटीन, फ्लेवर और अन्य रसायनों वाले लिक्विड को गर्म करना और उससे उत्पन्न भाप (एरोसोल) को सांस के द्वारा अंदर लेना। यह पारंपरिक धूम्रपान का एक आधुनिक रूप है, जिसमें धुएं के बजाय वेपर (भाप) का उपयोग होता है। जो हो मगर यह किसी भी तरह मान्य नहीं हो सकता, वो भी एक युवा खिलाड़ी द्वारा।
कौन है बिसात की शर्वाणिका?
दुनिया जब शतरंज में भारत का गुणगान गा रही है उसी समय एक और बिसात की नन्ही रानी बनी बच्ची ने भारत का परचम लहराया है और अब वो भारत लौटी है, मगर दुख यह है कि उसके स्वागत में क्रिकेट की तरह भीड़ नहीं थी बल्कि वो अकेली अपनी ट्राफी लिए लौटी। जी हां, ए एस शर्वाणिका एक नन्ही चैंपियन और उम्र सिर्फ ११ साल। भारत की युवा शतरंज खिलाड़ी शर्वाणिका ने फिडे वर्ल्ड वैâडेट एन्ड यूथ रेपिड चेस चैंपियनशिप में अंडर-१२ गर्ल्स वैâटेगरी का खिताब जीतकर देश का नाम रोशन किया है। यह प्रतियोगिता सर्बिया के व्रन्याच्का बान्या में आयोजित हुई, जहां दुनिया भर के ४० से अधिक देशों के युवा खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया। शर्वाणिका का प्रदर्शन बेहद शानदार रहा-उन्होंने ११ राउंड में १० जीत और १ ड्रॉ के साथ कुल १०.५ अंक हासिल किए और दूसरे स्थान से करीब ३ अंकों की बढ़त के साथ खिताब अपने नाम किया। खास बात यह है कि यह जीत उन्होंने उम्र के अगले वर्ग (अंडर-१२) में कदम रखते ही हासिल की, जबकि इससे पहले वे अंडर-१० में भी खिताब जीत चुकी हैं। यह जीत सिर्फ एक मेडल नहीं, बल्कि भारत के उभरते युवा टैलेंट की एक मजबूत पहचान है। कम उम्र में इतना बड़ा मंच जीतना यह दिखाता है कि देश में शतरंज का भविष्य कितना उज्ज्वल है, जहां नई पीढ़ी वैश्विक स्तर पर लगातार अपनी छाप छोड़ रही।
