अनिल तिवारी
दुनिया एक बार फिर आसमान की ओर देखने लगी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि उनकी सरकार यूएफओ यानी अज्ञात उड़ती वस्तुओं से जुड़ी अधिकतम जानकारी जल्द सार्वजनिक करेगी। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने कहा कि सैन्य पायलटों ने ऐसी चीजें देखी हैं, जिन पर भरोसा करना आसान नहीं है। हालांकि, पेंटागन पहले यह कह चुका है कि अब तक एलियंस या किसी बाहरी सभ्यता से जुड़ा ठोस प्रमाण नहीं मिला है।
यूएफओ का रहस्य नया नहीं है। १९४७ में अमेरिका के रोसवेल में कथित तौर पर एक रहस्यमय वस्तु गिरने की खबर ने दुनिया भर में सनसनी पैâला दी थी। सरकार ने इसे मौसम गुब्बारा बताया, लेकिन दशकों तक लोग मानते रहे कि वहां एलियन यान मिला था। इसी तरह नेवाडा का ‘एरिया ५१’ आज भी रहस्य, सैन्य परीक्षणों और एलियन कहानियों का सबसे बड़ा प्रतीक बना हुआ है।
आधुनिक दौर में यूएफओ को अब यूएपी यानी अनआइडेंटिफाइड एनोमैलस फिनॉमिना कहा जाता है। इसका अर्थ है, ऐसी हवाई या अंतरिक्षीय घटना जिसकी तुरंत पहचान न हो सके। कई अमेरिकी नौसैनिक पायलटों ने पिछले वर्षों में तेज गति से उड़ती, अचानक दिशा बदलती और रडार पर असामान्य व्यवहार दिखाती वस्तुओं को देखने का दावा किया है। इन्हीं दावों ने अमेरिकी कांग्रेस, रक्षा विभाग और आम जनता में नए सवाल खड़े किए हैं।
रहस्य तब और गहराता है जब सैन्य पायलट बताते हैं कि कुछ वस्तुएं मानो भौतिकी के नियमों को चुनौती दे रही थीं, बिना पंख, बिना इंजन की आवाज और अचानक गायब हो जाने वाली चाल। कुछ रिपोर्टों में समुद्र के ऊपर और पानी के भीतर भी असामान्य गतियों वाली वस्तुओं का जिक्र हुआ है। यही कारण है कि कई अमेरिकी सांसद सरकार से मांग कर रहे हैं कि जनता को बताया जाए कि इन फाइलों में आखिर क्या छिपा है। लेकिन यहां सावधानी जरूरी है। यूएफओ का अर्थ एलियन नहीं होता। कोई भी अज्ञात वस्तु ड्रोन, मौसमीय घटना, सैन्य मतकनीक, रडार भ्रम, उपग्रह, गुब्बारा या ऑप्टिकल इफेक्ट भी हो सकती है। पेंटागन ने पहले कई मामलों में कहा है कि जांच के बाद भी बाहरी जीवन का प्रमाण नहीं मिला। फिर भी कुछ घटनाएं ऐसी हैं, जिनका स्पष्ट उत्तर अब तक नहीं मिला। ट्रंप की घोषणा ने रोमांच इसलिए बढ़ा दिया है क्योंकि अमेरिका पहले भी गुप्त फाइलों, सैन्य वीडियो और पुराने रिकॉर्ड जारी कर चुका है। यदि नई फाइलें सामने आती हैं तो उनमें पायलटों की गवाही, रडार डेटा, वीडियो, उपग्रह सूचनाएं और पुराने जांच रिकॉर्ड शामिल हो सकते हैं। इससे यह स्पष्ट हो सकता है कि दुनिया ने आसमान में जो देखा, वह दुश्मन देशों की तकनीक थी, अमेरिकी सैन्य प्रयोग, प्राकृतिक घटना या कुछ ऐसा, जिसे विज्ञान अभी समझ नहीं पाया।
यूएफओ की कहानी में रहस्य, राजनीति, विज्ञान और कल्पना चारों शामिल हैं। एलियंस हों या न हों, इतना तय है कि आसमान में दिखने वाली हर अनजान रोशनी अब सिर्फ अफवाह नहीं मानी जा रही। सरकारें उसे दर्ज कर रही हैं, सेनाएं उसका विश्लेषण कर रही हैं और जनता जवाब मांग रही है। आने वाली फाइलें शायद एलियंस का प्रमाण न दें, लेकिन वे यह जरूर बताएंगी कि रहस्य सिर्फ फिल्मों में नहीं, हमारी दुनिया के आसमान में भी उड़ते हैं। यहां सवाल यह उठता है कि आखिर में ट्रंप ने यह घोषणा क्यों की है। इसके पीछे तर्क यह भी हो सकता है कि एपस्टीन फाइल्स जैसे मामलों को लगातार दबाए रखने के लिए ट्रंप ने जो ईरान युद्ध छेड़ा था अब वह काफी हद तक मीडिया का आकर्षण खो चुका है ऐसे में ट्रंप को किसी और आकर्षक मुद्दे की तलाश थी जिसकी आड़ में एप्स्टीन फाइल्स दबी रहे।
ट्रेन लेट हुई तो जवाबदेही भी तय होगी

भारतीय रेल देश की जीवनरेखा है, लेकिन जब यही जीवनरेखा यात्रियों के समय-धन और जरूरी योजनाओं को पटरी से उतार दे तो सवाल सिर्फ देरी का नहीं, जवाबदेही का बन जाता है। ओडिशा के बलांगिर जिला उपभोक्ता फोरम का हालिया पैâसला इसी दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। फोरम ने ट्रेन की भारी देरी के कारण फ्लाइट छूटने पर रेलवे को यात्री को मुआवजा देने का आदेश दिया। ट्रेन को सुबह ३.५५ बजे हावड़ा पहुंचना था। इसी आधार पर उन्होंने सुबह ८.०५ बजे कोलकाता से गुवाहाटी की फ्लाइट बुक की थी। लेकिन ट्रेन लगभग सात घंटे देरी से पहुंची और उनकी फ्लाइट छूट गई।
यह मामला आम यात्रियों के लिए एक बड़ा संदेश है। रेलवे अक्सर देरी को तकनीकी, परिचालन या सुरक्षा कारणों से जोड़कर अपनी जिम्मेदारी से बचने की कोशिश करती है, लेकिन उपभोक्ता फोरम ने स्पष्ट किया कि केवल सामान्य कारण गिनाने से रेलवे मुक्त नहीं हो सकती। यदि देरी अपरिहार्य थी, तो रेलवे को इसका ठोस प्रमाण देना होगा। फोरम ने इसे सेवा में कमी माना और यात्री को फ्लाइट नुकसान, मानसिक परेशानी और मुकदमे के खर्च के लिए मुआवजा देने का आदेश दिया। आदेश का समय पर पालन न होने से राशि बढ़कर करीब १.३ लाख रुपए तक पहुंच गई। ऐसी घटनाएं पहले भी सामने आती रही हैं, जब ट्रेन लेट होने से यात्रियों की परीक्षा, नौकरी का इंटरव्यू, इलाज, विवाह समारोह या विदेश यात्रा प्रभावित हुई। कई बार यात्री चुप रह जाते हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि रेलवे से लड़ना कठिन है। लेकिन यह पैâसला बताता है कि टिकट सिर्फ यात्रा का कागज नहीं, बल्कि सेवा का अनुबंध है। यात्री समय पर पहुंचने की उचित उम्मीद रखता है। अब जरूरत है कि रेलवे समयपालन को केवल घोषणा नहीं, बल्कि कानूनी जिम्मेदारी माने।
‘आप’ में बगावत, ‘गद्दारी’ और बदले के आरोप

`आम आदमी पार्टी’ इस समय अपने सबसे गंभीर राजनीतिक संकटों में से एक से गुजरती दिख रही है। राघव चड्ढा, स्वाति मालीवाल और राजिंदर गुप्ता सहित सात राज्यसभा सांसदों के भाजपा में शामिल होने के बाद पार्टी की अंदरूनी स्थिति, नेतृत्व शैली और वैचारिक मजबूती पर सवाल उठने लगे हैं। आप समर्थकों ने सोशल मीडिया पर इन नेताओं को ‘गद्दार’ कहना शुरू कर दिया, जबकि भाजपा इसे पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष और नेतृत्व से मोहभंग का परिणाम बता रही है।
इस घटनाक्रम में राघव चड्ढा सबसे अधिक चर्चा में रहे। वे कभी आम आदमी पार्टी के युवा, पढ़े-लिखे और आक्रामक चेहरे माने जाते थे। भाजपा में जाने के बाद उनके इंस्टाग्राम फॉलोअर्स में गिरावट की खबरों ने राजनीतिक लोकप्रियता और डिजिटल छवि की वास्तविकता पर नई बहस छेड़ दी। फेक फॉलोअर्स के आरोपों ने यह सवाल भी उठाया कि आज की राजनीति में सोशल मीडिया प्रभाव कितना वास्तविक और कितना निर्मित होता है। स्वाति मालीवाल ने अपने पैâसले को पार्टी के भीतर उपेक्षा और संवादहीनता से जोड़ा। उन्होंने कहा कि वे २००६ से जन आंदोलनों का हिस्सा रही हैं और महिला अधिकारों के लिए लंबे समय तक काम किया है। दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष रहते हुए उन्होंने महिलाओं से जुड़े मामलों में सक्रिय भूमिका निभाई और कानूनों को सख्त बनाने के लिए भूख हड़ताल भी की। उनके अनुसार, पार्टी के भीतर उठती असहमति को गंभीरता से नहीं लिया गया। इसी बीच पंजाब में राजिंदर गुप्ता से जुड़े ट्राइडेंट ग्रुप पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की जांच ने बदले की राजनीति के आरोपों को जन्म दिया। भाजपा ने इसे प्रतिशोध बताया, जबकि आप ने इसे नियमित कार्रवाई कहा। उधर, गुजरात में गोपाल इटालिया और चैतर वसावा से जुड़े विवादों ने पार्टी की छवि को और कमजोर किया है। कुल मिलाकर, आप के सामने चुनौती केवल दल-बदल रोकने की नहीं, बल्कि अपनी वैकल्पिक राजनीति की विश्वसनीयता बचाने की भी है।
