सामना संवाददाता / मुंबई
भारतीय रेलवे ने स्वास्थ्य सेवाओं में बड़ा बदलाव करते हुए कागजी रेफरल सिस्टम को पूरी तरह समाप्त कर दिया है। १ मई २०२६ से लागू नई व्यवस्था के तहत अब रेलकर्मियों और उनके आश्रितों को निजी अस्पताल में इलाज के लिए यूएमआईडी कार्ड और ओटीपी आधारित डिजिटल रेफरल अनिवार्य होगा। पश्चिम-मध्य रेलवे के निर्देश के बाद यह व्यवस्था देशभर में लागू कर दी गई है, जिसके दायरे में मुंबई के मध्य और पश्चिम रेलवे के लाखों कर्मचारी भी आ गए हैं।
नई प्रणाली के तहत भायखला स्थित रेलवे अस्पताल से लेकर मुंबई सेंट्रल के जगजीवन राम अस्पताल तक अब कहीं भी कागजी रेफरल जारी नहीं किया जाएगा। डॉक्टर द्वारा रेफरल सीधे डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से भेजा जाएगा, जिसे एचएमआईएस सिस्टम और मोबाइल ऐप पर देखा और डाउनलोड किया जा सकेगा। इस व्यवस्था में यूएमआईडी (यूनिक मेडिकल आइडेंटिटी कार्ड) और एचएमआईएस सिस्टम के जरिए मरीज की पूरी जानकारी ऑनलाइन ट्रांसफर की जाएगी। निजी अस्पताल में भर्ती होने के लिए मरीज के पंजीकृत मोबाइल नंबर पर भेजा गया ओटीपी अनिवार्य होगा। ओटीपी सत्यापन के बाद ही इलाज की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
रेलवे ने कर्मचारियों को निर्देश दिया है कि उनका यूएमआईडी कार्ड एक्टिव और अपडेट होना चाहिए, एचएमआईएस मोबाइल ऐप का उपयोग अनिवार्य है और मोबाइल नंबर सही व अपडेट होना जरूरी है। यदि ओटीपी प्राप्त नहीं होता है, तो इलाज की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
नई व्यवस्था के तहत कागजी रेफरल पूरी तरह समाप्त कर दिए गए हैं और केवल डिजिटल रेफरल ही मान्य होंगे। मरीज सूचीबद्ध अस्पतालों में से अपनी पसंद का चयन कर सकेंगे।
आपातकालीन स्थिति में मरीज सीधे निजी अस्पताल जा सकता है, लेकिन वहां भी यूएमआईडी कार्ड नंबर और ओटीपी के जरिए पंजीकरण अनिवार्य होगा। संबंधित अस्पताल को २४ घंटे के भीतर रेलवे से ऑनलाइन अनुमति लेनी होगी। इस तरह रेलवे ने स्वास्थ्य सेवाओं को पूरी तरह डिजिटल ढांचे में बदल दिया है, जहां अब इलाज की प्रक्रिया कागज के बजाय डिजिटल सिस्टम और ओटीपी पर आधारित होगी।
