द्रुप्ति झा / मुंबई
मुंबई मनपा में ९४ घंटे की लंबी बहस के बाद ८०,९५२ करोड़ रुपए का बजट पारित तो कर दिया गया, लेकिन पूरा सत्र अव्यवस्था, आरोप-प्रत्यारोप और राजनीतिक टकराव से घिरा रहा। २३७ पार्षदों में से केवल १८८ सदस्यों की सक्रिय भागीदारी ने भी कई सवाल खड़े किए, जबकि बाकी सदस्यों की निष्क्रियता पर चर्चा होती रही। मनपा के ऐतिहासिक सभागार में इस बार का बजट सत्र अभूतपूर्व होने के बजाय विवादों और तनाव का केंद्र बन गया। १२ दिनों तक चली कार्यवाही का सीधा प्रसारण जरूर किया गया, लेकिन इससे नगरसेवकों के बीच बढ़ती खींचतान और टकराव भी खुलकर सामने आया। ९४ घंटे की बहस राजनीतिक प्रतिस्पर्धा और आरोपों की होड़ में बदलती नजर आई। विपक्षी सदस्यों ने वित्तीय अनुशासन की कमी और संसाधनों के असमान वितरण पर गंभीर सवाल उठाए, लेकिन सत्ताधारी पक्ष ठोस जवाब देने के बजाय अपने पैâसलों का बचाव करता दिखा। इससे सदन में कई बार तनावपूर्ण स्थिति पैदा हुई। स्थिति तब और बिगड़ गई जब शुक्रवार तड़के १:१६ बजे २०२६-२७ का ८०,९५२.५६ करोड़ रुपए का बजट पारित किया गया।
