फ्रेंड लिस्ट में हैं जुड़े, सबके दोस्त हज़ार,
मगर पड़ोसी से नहीं, पहले जैसा प्यार॥
मोबाइल की स्क्रीन में, सिमटे रिश्तेदार,
पास रहकर भी लगे, दूर हुए परिवार।
आभासी मुस्कान में, खोया सच्चा प्यार—
फ्रेंड लिस्ट में हैं जुड़े, सबके दोस्त हज़ार॥
अपनापन बस चैट में, इमोजी में दुलार,
दिल की सच्ची बात का, कहीं नहीं व्यवहार।
दरवाज़े सब बंद हैं, सूना आँगन-द्वार—
फ्रेंड लिस्ट में हैं जुड़े, सबके दोस्त हज़ार॥
त्योहारों की रौनकें, बनी स्क्रीन की रीत ,
मिलने-जुलने की जगह, संदेशों की प्रीत।
रिश्तों की गर्माहट का, खोया अब तो सार—
फ्रेंड लिस्ट में हैं जुड़े, सबके दोस्त हज़ार॥
जागो अब इंसान तुम, जोड़ो सच्चा तार,
सबसे मीठा बोलकर, बाँटो थोड़ा प्यार।
सजे बसे जीवन तभी, होगा सुख अपार—
फ्रेंड लिस्ट में हैं जुड़े, सबके दोस्त हज़ार॥
-डॉ. सत्यवान सौरभ
