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अंडरवर्ल्ड सीक्रेट : दाऊद के `आदमी’ का छोटा राजन ने किया था खात्मा …. `लाला’ जैसे ही कोर्ट से निकला टपका डाला!

सूरज सिंह
मुंबई के अंडरवर्ल्ड की दुनिया में एक समय ऐसा था, जब कानून से बचना जितना मुश्किल था, उतना ही खतरनाक था अपने ही दुश्मनों से बचना। मनीष लाला इसी अंधेरी दुनिया का एक अहम किरदार था। तेज दिमाग, फर्राटेदार अंर्ग्रेजी और आर्थिक मामलों में पकड़ रखने वाला। वह सिर्फ एक गुंडा नहीं था, बल्कि दाऊद इब्राहिम के नेटवर्क का वह हिस्सा था, जो कोर्ट के मामलों और पैसों की जटिल व्यवस्था संभालता था।
मनीष लाला का नाम पुलिस रिकॉर्ड में तेजी से ऊपर चढ़ रहा था। उसके खिलाफ कई गंभीर मामले दर्ज थे और पुलिस उसे लंबे समय से तलाश रही थी। उसे यह अंदाजा हो चुका था कि अगर वह बाहर रहा तो कभी भी पुलिस मुठभेड़ में मारा जा सकता है। इसी डर ने उसे एक बड़ा कदम उठाने पर मजबूर किया। उसने अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया। न्यायालय में शरण लेना उसे एक सुरक्षित रास्ता लगा। उसे लगा कि अब कानून के दायरे में रहकर वह अपनी जान बचा सकेगा। कुछ समय बाद उसे जमानत भी मिल गई, लेकिन अंडरवर्ल्ड के नियम अदालत के नियमों से अलग होते हैं। यहां एक बार दुश्मनी हो जाए, तो उसका अंत सिर्फ मौत से होता है। मनीष लाला की दुश्मनी छोटा राजन गैंग से हो चुकी थी। जैसे ही उसे जमानत मिली और वह कोर्ट के बाहर आया, वैसे ही उसका अंत तय हो गया। मुंबई के फोर्ट इलाके में अदालत के बाहर ही दिनदहाड़े उस पर गोलियों की बौछार कर दी गई। यह हमला इतना तेज और सुनियोजित था कि उसे संभलने का मौका तक नहीं मिला। कुछ ही पलों में मनीष लाला की मौत हो गई। यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि मुंबई के अंडरवर्ल्ड में ‘शरण’ जैसी कोई चीज नहीं होती। चाहे कोई अदालत में क्यों न पहुंच जाए, अगर वह गैंगवॉर का हिस्सा है, तो उसकी किस्मत अक्सर पहले से लिखी होती है। मनीष लाला की कहानी सिर्फ एक गैंगस्टर की मौत नहीं, बल्कि उस दौर की सच्चाई है जहां कानून और अपराध की दुनिया आमने-सामने खड़ी थी और बीच में फंसे लोग अक्सर किसी भी तरफ से सुरक्षित नहीं थे।

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