सामना संवाददाता / मुंबई
मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (एमएमआरडीए) की मेट्रो परियोजनाओं के लिए लागू की गई नई टेंडर शर्तों ने निर्माण कंपनियों और ठेकेदारों में जबरदस्त नाराजगी पैदा कर दी है। करीब ३०० करोड़ रुपए के दो बड़े टेंडरों में जोड़े गए नए नियम को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं कि यह पैâसला विकास के लिए लिया गया है या अनुभवी कंपनियों को बाहर करने की कोशिश है।
एमएमआरडीए ने नई शर्त रखी है कि जो कंपनियां पहले से दो या उससे अधिक मेट्रो स्टेशन परियोजनाओं पर काम कर रही हैं, उन्हें नए टेंडर में हिस्सा लेने की अनुमति नहीं मिलेगी। इस पैâसले को लेकर ठेकेदारों ने इसे ‘मनमाना और भेदभावपूर्ण नियम’ बताते हुए कड़ा विरोध जताया है। उनका कहना है कि जिन एजेंसियों के पास अनुभव, तकनीकी क्षमता और संसाधन हैं, उन्हें ही बाहर किया जा रहा है, जिससे प्रतिस्पर्धा सीमित हो रही है।
मुंबई मेट्रो लाइन-४ परियोजना से जुड़ा यह विवाद अब गंभीर रूप ले चुका है। ४ मई को हुई प्री-बिड बैठक में १० से अधिक कंपनियों ने इस शर्त पर आपत्ति दर्ज कराई। प्रतिनिधियों ने कहा कि एक तरफ पारदर्शिता और प्रतिस्पर्धा की बात की जाती है, वहीं दूसरी तरफ ऐसे नियम लागू हो रहे हैं जो खुले मुकाबले को प्रभावित कर सकते हैं। निर्माण क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि अनुभवी कंपनियों को बाहर करने से परियोजनाओं की गुणवत्ता और समयसीमा पर असर पड़ सकता है। पहले से ही कई मेट्रो प्रोजेक्ट देरी का सामना कर रहे हैं, ऐसे में यह विवाद एमएमआरडीए की कार्यप्रणाली पर नए सवाल खड़े कर रहा है। अब देखना यह होगा कि बढ़ते विरोध के बीच एमएमआरडीए अपने पैâसले पर कायम रहता है या नियमों में बदलाव करता है।
