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पायधुनी ‘तरबूज कांड’ … ५४ टेस्ट से खुला ‘मर्डर’ का राज! …भाई-बहनों पर शक; रिमांड पर ले सकती है पुलिस

डोकाडिया परिवार के चार सदस्यों की हुई थी मौत

सामना संवाददाता / मुंबई
११ दिन और ५४ टेस्ट के बाद पता चला है कि पायधुनी में डोकाडिया परिवार के चार सदस्यों का मर्डर किया गया था। पहले कहा जा रहा था कि
उनकी मौत फूड पॉइजनिंग से हुई थी। फोरेंसिक लैब की रिपोर्ट से पता चला कि उनकी मौत चूहे मारने की दवा से हुई है। मरने वालों के विसरा और तरबूज के सैंपल में ‘जिंक फॉस्फाइड’ नाम का जहर मिला था।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, यह जहर फल के अंदर वैâसे पहुंचा, यह अब पुलिस जांच का मुख्य हिस्सा होगा। अब पुलिस की जांच मर्डर एंगल से शुरू होगी। एक पुलिस अफसर ने कहा कि घटना की शुरुआत में अब्दुल्ला डोकाडिया के भाई और बहनों से सख्ती से पूछताछ नहीं की गई थी, क्योंकि चारों की मौत फूड पॉइजनिंग से होने का शक था, अब जांच का दायरा बदल गया है और बढ़ भी गया है।

होगी सख्ती से पूछताछ
अब अब्दुल्ला डोकाडिया के चार भाइयों और दो बहनों से सख्ती से पूछताछ होगी। उनके बयान भी रिकॉर्ड करेंगे। ये लोग वहां आसपास ही रहते हैं। एक ऑफिसर ने बताया कि पुलिस को पूरा शक है कि या तो घर में किसी ने तरबूज में जहर मिलाया होगा या फिर सप्लाई चेन में मिला दिया होगा।

मुश्किल था केस
पुलिस की प्राथमिकता अब मर्डर एंगल से जांच की है। पुलिस इसके अलावा यह भी पता लगाएगी कि तरबूज में जहर वैâसे मिला? क्या यह वेंडर की तरफ से हुआ या इसमें कोई और शामिल है? पुलिस के मुताबिक, एफएसएल को आम तौर पर ज्यादा समय लगा। वैसे तो टॉक्सिन का पता आम तौर पर पहले १० से २० राउंड की टेस्टिंग में चल जाता है, लेकिन डोकाडिया का केस मुश्किल था।

फेफड़ों में भरी
फॉस्फीन ने ली पूरे
परिवार की जान!
पायधुनी के तरबूज कांड में नया खुलासा
डोकाडिया परिवार की मौत का रहस्य गहरा गया है। पहले फूड पॉइजनिंग का शक था पर अब मामला मर्डर का हो गया है। एक फोरेंसिक अधिकारी ने बताया कि परिवार ने टॉक्सिन (जहर) का एक बड़ा हिस्सा उल्टी करके बाहर निकाल दिया था इसलिए बची हुई मात्रा का पता लगाने के लिए ५४ राउंड की टेस्टिंग करनी पड़ी। अधिकारी ने आगे बताया कि जिंक फॉस्फाइड के निगलने से शरीर में फॉस्फीन गैस बनने लगती है। जब यह गैस फेफड़ों में जाती है तो इससे ऑक्सीजन का लेवल तेजी से गिर जाता है।
घटना में सबसे पहले छोटे बच्चे की मौत हुई। उनका शरीर जहर को झेल नहीं पाया। जांच में शामिल एक ऑफिसर ने बताया कि घर में कोई बचा हुआ सामान नहीं मिला, सिवाय एक चूहे मारने वाली दवा के जो उन्हें पहले दिन उनके दूसरे फ्लोर वाले घर पर मिली थी। पुलिस ने एक बोतल चेक की, लेकिन उसमें जिंक फॉस्फाइड नहीं है, बल्कि वह एक हर्बल मिश्रण है। डोकाडिया परिवार के रिश्तेदारों ने कहा कि उनके घर में चूहों की समस्या थी, जैसा कि बिल्डिंग के कई फ्लैट में था। बता दें कि २५ अप्रैल की रात, साउथ मुंबई के पायधुनी इलाके में रहने वाले अब्दुल्ला डोकाडिया, उनकी पत्नी नसरीन डोकाडिया और बेटियों आयशा व जैनब ने पांच दूसरे रिश्तेदारों के साथ खाना खाया। रात करीब १.३० बजे, चार लोगों के परिवार ने तरबूज खाया और अगले १२ घंटों में उनकी मौत हो गई थी।

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