-सुप्रीम कोर्ट में जाए सरकार, वर्ना कांग्रेस जाएगी
– वडेट्टीवार ने महायुति सरकार पर साधा निशाना
सामना संवाददाता / मुंबई
मीरा-भायंदर की २५४ एकड़ सरकारी जमीन को लेकर महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा विस्फोट हुआ है। कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार ने महायुति सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि हजारों करोड़ रुपए की सरकारी संपत्ति को बचाने के बजाय सरकार ने निजी बिल्डरों को फायदा पहुंचाने का काम किया। उन्होंने सवाल उठाया कि जब जमीन को सरकारी साबित करने वाले दस्तावेज और प्रशासनिक आदेश मौजूद थे, तब अदालत में मजबूत पैरवी क्यों नहीं की गई? सरकार की भूमिका को संदिग्ध बताते हुए उन्होंने पूछा कि हाई कोर्ट का पैâसला आने तक सरकार आखिर क्या करती रही? अब जब मामला हाथ से निकल गया, तब सुप्रीम कोर्ट जाने की बात करना केवल जनता को गुमराह करने की कोशिश है।
वडेट्टीवार ने आरोप लगाया कि कानूनी प्रक्रिया में जानबूझकर ढिलाई बरतकर बिल्डर लॉबी को फायदा पहुंचाया गया और राज्य की संपत्ति दांव पर लगा दी गई। नागपुर में बोलते हुए उन्होंने कहा कि इस जमीन के मालिकाना हक को लेकर उच्च न्यायालय के पैâसले और उस पर राज्य सरकार की भूमिका जनता की आंखों में धूल झोंकने वाली है। उन्होंने आरोप लगाया कि मूल रूप से सरकारी जमीन को निजी डेवलपर्स के कब्जे में देने के लिए प्रशासनिक स्तर पर जानबूझकर देरी की गई। वडेट्टीवार ने कहा कि मीरा-भायंदर की यह जमीन मूलत: राज्य सरकार की थी, लेकिन सरकार की पूर्व अनुमति के बिना भूमि अभिलेखों में बदलाव किए गए। जिलाधिकारी ने जमीन को सरकार के नाम दर्ज करने के आदेश भी दिए थे। इसके बावजूद वरिष्ठ स्तर पर इस मामले को गंभीरता से आगे क्यों नहीं बढ़ाया गया, यह बड़ा सवाल है। उन्होंने कहा कि ३० अप्रैल २०२६ को उच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार की अपील खारिज करते हुए जमीन को ‘मीरा सॉल्ट वर्क्स’ की संपत्ति माना। जबकि सुनवाई क्षेत्राधिकार के मुद्दे पर हो रही थी। ऐसे में मालिकाना हक का पैâसला निजी कंपनी के पक्ष में जाना सरकारी वकीलों और विधि विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है। उन्होंने तंज कसते हुए पूछा कि क्या सरकारी वकील सो रहे थे?
जनता की संपत्ति
यह २५४ एकड़ जमीन जनता की संपत्ति है और इसे निजी डेवलपर्स को सौंपना राज्य के खजाने को भारी नुकसान पहुंचाने जैसा है। उन्होंने आरोप लगाया कि नमक की जमीन होने के पर्याप्त सबूत मौजूद होने के बावजूद अदालत में सरकार ने मजबूत पक्ष नहीं रखा, जिसके कारण जमीन हाथ से निकल गई। यदि सरकार सुप्रीम कोर्ट जाने में भी टालमटोल करती है तो कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर खुद अदालत का दरवाजा खटखटाएगी।
