सामना संवाददाता / मुंबई
मुंबई विश्वविद्यालय के अंतर्गत संचालित सेंटर फॉर हिंदू स्टडीज ने शैक्षणिक वर्ष 2026-27 के लिए एम.ए./पीजी डिप्लोमा इन टेंपल मैनेजमेंट विशेष पाठ्यक्रम की प्रवेश प्रक्रिया प्रारंभ कर दी है। मंदिर प्रबंधन, सांस्कृतिक धरोहर संरक्षण, धार्मिक प्रशासन और सामाजिक नेतृत्व के क्षेत्र में करियर बनाने के इच्छुक विद्यार्थियों के लिए यह पाठ्यक्रम एक महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा है।
एक वर्षीय (NEP 2020 आधारित) इस पाठ्यक्रम में मंदिर परंपराएं, मंदिर अर्थव्यवस्था, वित्तीय प्रबंधन, सार्वजनिक न्यास अधिनियम, मंदिर आधारभूत संरचना, भक्त सेवाएं, तकनीक, आपदा प्रबंधन तथा स्वास्थ्य प्रबंधन जैसे विषयों का विस्तृत समावेश किया गया है। विद्यार्थियों को पारंपरिक ज्ञान के साथ आधुनिक प्रशासनिक प्रणाली का प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा, जिससे वे मंदिरों को आध्यात्मिक, सामाजिक और संस्थागत केंद्र के रूप में प्रभावी ढंग से संचालित कर सकें।
प्रवेश के लिए किसी भी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से स्नातक होना आवश्यक है। साथ ही सांस्कृतिक विरासत, धार्मिक परंपरा और समाज सेवा में रुचि रखने वाले विद्यार्थी पात्र होंगे। चयन प्रक्रिया पूर्णतः मेरिट आधारित रहेगी। इच्छुक अभ्यर्थियों को ऑनलाइन आवेदन भरकर आवश्यक दस्तावेज अपलोड करना अनिवार्य होगा।
इस पाठ्यक्रम के माध्यम से मंदिर प्रशासक, धार्मिक ट्रस्ट प्रबंधन, तीर्थ एवं पर्यटन क्षेत्र, कार्यक्रम एवं भीड़ प्रबंधन सहित विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक संस्थानों में करियर के व्यापक अवसर उपलब्ध होंगे।
मुंबई विश्वविद्यालय के कलीना परिसर स्थित इस पाठ्यक्रम के लिए आवेदन प्रक्रिया जून 2026 से प्रारंभ होकर जुलाई 2026 तक जारी रहेगी। सीमित सीटों के कारण इच्छुक विद्यार्थियों से शीघ्र आवेदन करने की अपील की गई है।
“Preserving Heritage, Managing Temples, Serving Society” के ध्येय वाक्य के अंतर्गत संचालित यह पाठ्यक्रम भारतीय मंदिर प्रबंधन को आधुनिक, संगठित और व्यावसायिक दिशा देने वाला एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगा, यह बात हिंदू स्टडीज के डायरेक्टर डॉ. माधवी नरसाळे और डेप्युटी डायरेक्टर रविकांत सांगुर्डे ने बताया है।
