-मोदी सरकार के संदेश पर विपक्ष का जोरदार पलटवार
-‘चुनाव खत्म होते ही सरकार को याद आया ‘त्याग’
सामना संवाददाता / मुंबई
पीएम मोदी की अपील के बाद देश की राजनीति गरमा गई है। ‘पहले अच्छे दिन, अब कटौती के दिन’ कहते हुए शिवसेना, कांग्रेस, राकांपा और अन्य विपक्षी दलों ने मोदी सरकार पर जोरदार हमला बोला है। विपक्ष का आरोप है कि चुनाव खत्म होते ही सरकार को अचानक ‘त्याग’ और ‘कटौती’ की याद आ गई, जबकि सत्ता खुद चुनावी प्रचार, सरकारी आयोजनों और विदेशी दौरों में खुलकर खर्च करती रही।
विपक्षी नेताओं ने सवाल उठाया कि आर्थिक संकट और महंगाई का बोझ आखिर सिर्फ आम जनता ही क्यों उठाए? उनका कहना है कि जनता को ‘तेल कम खाओ’ का उपदेश देने के बजाय सरकार को पहले अपनी फिजूलखर्ची और गलत नीतियों पर नियंत्रण करना चाहिए। राकांपा विधायक रोहित पवार ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि मौजूदा युद्ध जैसी परिस्थितियों में मितव्ययिता का संदेश गलत नहीं है, लेकिन इसकी शुरुआत सरकार और भाजपा शासित राज्यों से होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावों में पानी की तरह पैसा बहाने वाली भाजपा अब जनता को बचत का पाठ पढ़ा रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा शासित राज्यों को पहले भ्रष्टाचार रोकने, अनावश्यक खर्च कम करने, बड़े वाहन काफिले और विदेशी दौरों पर रोक लगाने की सलाह दी जानी चाहिए।
पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का संकेत
रोहित पवार ने यह भी सवाल उठाया कि क्या प्रधानमंत्री का यह संदेश आने वाले समय में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का संकेत है? इसी तरह शिवसेना विधायक अंबादास दानवे ने कहा कि यदि देश संकट में है तो सरकार को स्पष्ट रूप से बताना चाहिए कि संकट कितना गंभीर है।
