एजेंसी / लॉस एंजेलिस
अमेरिका के डेनवर अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर फ्रंटियर एयरलाइंस की उड़ान ४३४५ के साथ हुई भयावह घटना ने विमान सुरक्षा के एक पुराने लेकिन बेहद गंभीर सवाल को फिर सामने ला दिया है, आपातकाल में जान पहले या सामान?
रिपोर्टों के अनुसार, ८ मई २०२६ की रात डेनवर से लॉस एंजेलिस जा रही फ्रंटियर एयरलाइंस की उड़ान ने टेकऑफ के दौरान रनवे पर मौजूद एक व्यक्ति को टक्कर मार दी। उस व्यक्ति ने कथित रूप से हवाई अड्डे की सुरक्षा बाड़ पार कर रनवे में प्रवेश किया था और उसकी मृत्यु हो गई। विमान में २२४ यात्री और ७ क्रू सदस्य सवार थे। टक्कर के बाद इंजन में आग और केबिन में धुआं भरने की स्थिति बनी, जिसके बाद यात्रियों को आपातकालीन स्लाइड से बाहर निकाला गया। १२ लोगों को मामूली चोटें आर्इं, जिनमें से ५ को अस्पताल ले जाया गया। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि विमान के भीतर से सामने आए वीडियो में कुछ यात्री धुएं और अफरातफरी के बीच अपना सामान समेटते दिखे। रिपोर्ट के मुताबिक, क्रू सदस्य बार-बार ‘सब कुछ छोड़ दीजिए’ कहकर यात्रियों को तुरंत बाहर निकलने के लिए कह रहे थे, लेकिन कुछ यात्री बैग और निजी सामान ले जाने पर अड़े दिखे। यह केवल अनुशासनहीनता नहीं, बल्कि सामूहिक सुरक्षा से खिलवाड़ है। विमान की आपात निकासी में हर सेकंड की कीमत होती है।
सुरक्षा निर्देश सिर्फ औपचारिकता नहीं
यहां यह समझना बेहद जरूरी है कि हवाई जहाज में सुरक्षा निर्देश सिर्फ औपचारिकता नहीं होते। हादसे के समय अपना सामान छोड़ दें का अर्थ है अपनी और दूसरों की जान बचाएं। इस घटना ने फिर याद दिलाया कि आपातकाल में बैग, मोबाइल, लैपटॉप या पासपोर्ट से पहले सबसे जरूरी है, जीवित बाहर निकलना।
