-फडणवीस के आदेश पर उठे गंभीर सवाल
-पीडब्ल्यूडी के पत्र से बढ़ी राजनीतिक हलचल…थर्ड पार्टी जांच हटाने से मचा विवाद
सुनील ओसवाल / नासिक
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस कुंभ मेले के विकास कार्यों को लेकर मंचों से लगातार ‘गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होगा’ की घोषणा कर रहे हैं, लेकिन ऐसा प्रतीत हो रहा है कि सार्वजनिक बांधकाम विभाग के कुछ अधिकारी मुख्यमंत्री के आदेशों को गंभीरता से लेने के मूड में नहीं हैं। हालात इतने आगे बढ़ चुके हैं कि अब उन्हीं कुंभ कार्यों की थर्ड पार्टी गुणवत्ता जांच हटाने की कोशिश शुरू हो गई है, जिनकी पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने सख्त निर्देश दिए थे।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि सार्वजनिक बांधकाम विभाग के सचिव (सड़क) शरद राजभोज के नासिक दौरे के तुरंत बाद विभाग की ओर से कुंभ प्राधिकरण को पत्र भेजकर कहा गया कि सार्वजनिक बांधकाम विभाग के कार्यों को तृतीय पक्ष यानी थर्ड पार्टी गुणवत्ता परीक्षण से बाहर रखा जाए। हालांकि, सचिव (सड़क) राजभोज की ओर से इस पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन विभागीय सूत्रों के मुताबिक दौरे के बाद अचानक बदले विभागीय रुख ने प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में तीखी चर्चाओं को जन्म दे दिया है।
फडणवीस की घोषणा बनाम विभाग की कार्रवाई
मुख्यमंत्री फडणवीस ने स्पष्ट कहा था कि कुंभ कार्यों में घटिया काम बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसी नीति के तहत तत्कालीन सचिव मनीषा म्हैसकर ने अतिरिक्त प्रयोगशालाएं स्थापित करने और तटस्थ संस्थाओं के माध्यम से गुणवत्ता जांच मजबूत करने के निर्देश दिए थे। लेकिन अब वही विभाग यह कह रहा है कि उनके पास अथॉरिटी इंजीनियर, गुणवत्ता नियंत्रण शाखा और टेस्टिंग सिस्टम पहले से मौजूद हैं, इसलिए अलग से थर्ड पार्टी जांच की जरूरत नहीं है।
३५ हजार करोड़ के काम और जांच से बेचैनी क्यों?
नासिक और आसपास कुंभ परियोजनाओं के तहत लगभग ३५ से ३६ हजार करोड़ रुपये के काम चल रहे हैं। इतनी बड़ी राशि के बावजूद यदि विभाग तटस्थ जांच से दूरी बना रहा है, तो संदेह और गहरा हो रहा है। सूत्रों के अनुसार, कुंभ प्राधिकरण ने भी इस प्रस्ताव को आसानी से स्वीकार नहीं किया है।
