सामना संवाददाता / मुंबई
मुंबई में सड़क सुरक्षा को लेकर किए जा रहे दावों पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। मनपा ने शहर के ४८ दुर्घटना-प्रवण ‘ब्लैक स्पॉट’ पॉइंट्स को सुधारने के लिए करीब २२ करोड़ रुपए का टेंडर जारी किया है, लेकिन लगातार हो रहे हादसों के बीच यह कदम काफी देर से उठाया गया माना जा रहा है। वर्षों से इन खतरनाक स्थानों पर दुर्घटनाएं होती रहीं, बावजूद इसके प्रशासन प्रभावी उपाय लागू करने में विफल रहा।
मनपा द्वारा चिह्नित किए गए ब्लैक स्पॉट्स में अमर महल जंक्शन, सायन सर्कल, किंग्स सर्कल, हाजी अली जंक्शन और माहिम जंक्शन जैसे अत्यधिक व्यस्त इलाके शामिल हैं। इन स्थानों पर आए दिन सड़क हादसे होते रहे हैं, लेकिन ट्रैफिक प्रबंधन और सुरक्षा उपायों की कमी लंबे समय से बनी हुई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि केवल टेंडर जारी करने से समस्या का समाधान नहीं होगा। मुंबई में इससे पहले भी सड़क सुधार और सुरक्षा परियोजनाओं पर करोड़ों रुपए खर्च किए गए, लेकिन जमीनी स्तर पर अपेक्षित बदलाव दिखाई नहीं दिए। कई इलाकों में खराब सड़क डिजाइन, अव्यवस्थित ट्रैफिक व्यवस्था, अपर्याप्त स्ट्रीट लाइटिंग और पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित सुविधाओं का अभाव आज भी कायम है।
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के मानकों के अनुसार, ‘ब्लैक स्पॉट’ ऐसे क्षेत्र को कहा जाता है, जहां लगातार गंभीर दुर्घटनाएं और मौतें होती हैं। इसके बावजूद मुंबई में ऐसे खतरनाक स्थलों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिससे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
मनपा के दावे और मुंबईकरों का सवाल
मनपा का दावा है कि सड़क डिजाइन में बदलाव, आधुनिक ट्रैफिक सिग्नल, बेहतर रोशनी और पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित क्रॉसिंग जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। हालांकि, मुंबईकरों का मानना है कि हर साल बड़े बजट और नई योजनाओं की घोषणाएं होती हैं, लेकिन शहर की सड़कें अब भी सुरक्षित नहीं बन पाई हैं। ऐसे में २२ करोड़ की यह परियोजना वास्तव में कितनी कारगर साबित होगी, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
