द्रुप्ति झा / मुंबई
मुंबई के बांद्रा-ईस्ट रेलवे स्टेशन के पास गरीब नगर के निवासियों ने मंगलवार को मनपा प्रशासन के खिलाफ आक्रोश, बेबसी और विश्वासघात की भावना व्यक्त की। दरअसल गरीब नगर इलाके में मुंबई हाई कोर्ट के आदेश के बाद पश्चिम रेलवे और स्थानीय प्रशासन द्वारा लगभग ४०० अवैध झुग्गी-झोपड़ियों को हटाने की कार्रवाई शुरू की गई है। इस कार्रवाई के कारण स्थानीय नागरिकों में भारी आक्रोश देखा गया। निवासियों का आरोप है कि उनके सिर से छत छीन ली गई, मनपा ने उनको बिना कोई नोटिस दिए ही उनके झोप़ड़ों को तोड़ा। जिसके चलते मनपा के खिलाफ वहां लोगों ने काफी हंगामा किया। अधिकारियों ने बताया कि यह अभियान अगले चार दिनों तक जारी रहेगा।
लोगों ने लगाए गंभीर आरोप
एक निवासी ने कहा, ‘हमारे पास आधार-पैन और वोटर आईडी कार्ड हैं फिर भी बिना किसी सर्वे के तोड़फोड़ हो गई। अब हम मदद के लिए किसके पास जाएं? नेता जब चुनाव के वक्त हमसे वोट मांगने आते हैं तो हम ‘अवैध’ लोग वैध हो जाते हैं। हर राजनेता, सांसद और विधायक यहां वोट मांगने आते थे, लेकिन अब जब हमें हमारे घरों से बेदखल किया जा रहा है, तो मदद करने वाला कोई नहीं है।’ एक महिला ने पुनर्वास प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि सरकार सिर्फ १०० लोगों को घर दे रही है जबकि लगभग ३०० अन्य लोग बेघर हैं। यहां करीब ४०० निवासी रहते हैं। वे हमें एक ही दिन में बेघर वैâसे कर सकते हैं?
क्यों तोड़ी गई झोपड़ियां?
जानकारी के अनुसार, यह तोड़क अभियान वेस्टर्न रेलवे की सांताक्रुज-मुंबई सेंट्रल कॉरिडोर पर पांचवीं और छठी रेलवे लाइन परियोजना के लंबे समय से लंबित होने से जुड़ा है, जिसका उद्देश्य मुंबई के उपनगरीय रेल नेटवर्क पर भीड़भाड़ को कम करना है। अधिकारियों ने कहा कि खाली कराई गई भूमि से मुंबई से शुरू होने वाली लगभग ५० नई ट्रेनों की सुविधा और बांद्रा टर्मिनस के विस्तार में सहायता मिलेगी।
