सैन्य-औद्योगिक तंत्र से जुड़े संस्थानों पर प्रतिबंध वाला विधेयक हुआ पेश
एजेंसी / वॉशिंगटन
चीन से संबंध बेहतर करने गए ट्रंप के दौरे के तुरंत बाद अमेरिका में एक ऐसा विधेयक पेश किया गया है, जिससे शी जिनपिंग नाराज हो सकते हैं। ऐसा उस वक्त हुआ है, जब हाल ही में ट्रंप चीन के दौरे से लौटे हैं। अमेरिका में दो वरिष्ठ रिपब्लिकन सांसदों ने चीन के सैन्य-औद्योगिक तंत्र से जुड़े चीनी संस्थानों पर प्रतिबंधों में तेजी लाने के उद्देश्य से एक विधेयक पेश किया है।
उनका कहना है कि अमेरिका अब चीनी कम्युनिस्ट पार्टी से जुड़े खतरों के खिलाफ कार्रवाई में और देरी नहीं कर सकता। सीनेटर रिक स्कॉट और प्रतिनिधि एलिस स्टेफानिक ने ‘सीसीपी सैंक्शंस शॉट क्लॉक एक्ट’ पेश किया। इस विधेयक के तहत अमेरिकी ट्रेजरी विभाग को उन चीनी व्यक्तियों या संस्थाओं के खिलाफ एक साल के भीतर कार्रवाई करना जरूरी होगा, जिन्हें अमेरिकी सरकार ने सुरक्षा के लिए खतरा माना है। इस विधेयक का मकसद वित्त वर्ष २०२६ के लिए राष्ट्रीय रक्षा प्राधिकरण अधिनियम में संशोधन करना है। इसके तहत एक साल की ‘शॉट क्लॉक’ (समय सीमा) तय की जाएगी, जिसके भीतर पहचानी गई संस्थाओं को ट्रेजरी विभाग की ‘नॉन-एसडीएन चीनी सैन्य-औद्योगिक कॉम्प्लेक्स कंपनियों की सूची’ में शामिल करना होगा। वर्तमान कानून के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति को हर दो साल में एक रिपोर्ट पेश करनी होती है, जिसमें उन चीनी नागरिकों या संस्थाओं की पहचान की जाती है, जो अमेरिकी सरकारी सूचियों में शामिल हैं और जिन्हें एनएस-सीएमआईसी सूची में डाला जा सकता है। हालांकि, ट्रेजरी विभाग पर इस सूची को अपडेट करने के लिए कोई निश्चित समय-सीमा लागू नहीं है। प्रस्तावित कानून इस व्यवस्था को बदल देगा।
पाकिस्तान के २ दिन में २ जेट धड़ाम
चीन की इज्जत मिट्टी में मिली
पाकिस्तान एयर फोर्स को दो दिन के अंदर दो बड़े झटके लगे। पहले १९ मई २०२६ को कामरा के पास चाइनीज व्इ-१७ थंडर फाइटर जेट व्रैâश हो गया। इसके अगले ही दिन २० मई को मियांवाली जिले में दूसरा चाइनीज ट्रेनर जेट भी धड़ाम से नीचे गिर गया। दोनों हादसों में पायलट सुरक्षित इजेक्ट कर गए, लेकिन दोनों जेट पूरी तरह नष्ट हो गए। पाकिस्तानी अधिकारियों ने शुरुआती तौर पर दोनों मामलों में तकनीकी खराबी को वजह बताया है। यह सिर्फ दो अलग-अलग हादसे नहीं, बल्कि पाकिस्तान में उड़ रहे चीनी जेट्स की विश्वसनीयता और मेंटेनेंस सिस्टम पर फिर सवाल खड़े कर रहे हैं।
