मुख्यपृष्ठस्तंभतड़का: सुरक्षा का टिकट है जागरूकता

तड़का: सुरक्षा का टिकट है जागरूकता

कविता श्रीवास्तव

हाल के दिनों में राजस्थान के अमरपुरा-कोटा, बिहार के सासाराम और पश्चिम बंगाल के हावड़ा क्षेत्र में रेलवे डिब्बों में आग लगने की घटनाओं ने रेलयात्रियों में चिंता बढ़ाई है। यह चिंता स्वाभाविक है क्योंकि जरूरत पड़ने पर हर किसी को रेल यात्रा करनी ही पड़ती है। वैसे तो रेलवे को सबसे सुरक्षित साधन समझा जाता है, लेकिन यात्रा में चोरी होने, दुर्घटनाएं होने और आग लगने जैसी घटनाएं चिंताएं बढ़ाती हैं। आग लगने के ताजा मामलों में रेलवे ने प्रारंभिक जांच में कुछ असामाजिक तत्वों की भूमिका की आशंका जताई है। ऐसे असामाजिक तत्वों पर निगाह रखना जिम्मेदार एजेंसियों का काम है। फिर भी हर दुर्घटना के लिए केवल सिस्टम को दोष देना उचित नहीं है। यह भी समझना होगा कि रेलयात्रा में सतर्कता केवल रेलवे प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि यात्रियों की जिम्मेदारी भी है। भारतीय रेल का दुनिया में सबसे बड़ा रेल नेटवर्क है। प्रतिदिन करोड़ों यात्री ट्रेन से सफर करते हैं। इतनी विशाल व्यवस्था में सुरक्षा बनाए रखना केवल तकनीकी व्यवस्थाओं से संभव नहीं है, इसमें जनसहयोग भी जरूरी है। कई बार छोटी-छोटी लापरवाहियां बड़ी दुर्घटनाओं का कारण बन जाती हैं। ट्रेन में ज्वलनशील पदार्थ ले जाना, धूम्रपान करना, बिजली के उपकरणों से छेड़छाड़ करना, चेन-पुलिंग का दुरुपयोग या संदिग्ध वस्तुओं की अनदेखी करना गंभीर खतरा पैदा कर सकता है। रेलवे यात्रियों से हमेशा अपील करता है कि वे सुरक्षा नियमों का पालन करें। संदिग्ध व्यक्ति, लावारिस सामान, धुआं, आग की गंध या तकनीकी खराबी दिखाई देने पर तुरंत सूचना दें। इससे कई बार बड़ी दुर्घटना टल सकती हैं और टली भी हैं। रेलवे की सुरक्षा हेल्पलाइन यात्रियों की सहायता के लिए हर समय उपलब्ध रहती हैं। हम यात्रियों को यह भी समझना होगा कि रेलवे की संपत्ति सार्वजनिक संपत्ति है यानी देश की संपत्ति है। ट्रेन के डिब्बों, सीटों, खिड़कियों, बिजली के पैनलों या सुरक्षा उपकरणों से छेड़छाड़ न केवल कानूनन अपराध ही नहीं, बल्कि हजारों यात्रियों की जान जोखिम में डालने जैसा है। अक्सर देखा गया है कि कुछ लोग मनोरंजन या गुस्से में तोड़फोड़ करते हैं, लेकिन उसका परिणाम बेहद गंभीर हो सकता है। रेलवे प्रशासन आधुनिक फायर डिटेक्शन सिस्टम, सीसीटीवी वैâमरे, रेलवे सुरक्षा बल की निगरानी के साथ जागरूकता अभियान चलाती है। लेकिन सुरक्षा तभी प्रभावी होगी जब यात्री भी सहयोग करेंगे। यात्रा के दौरान बच्चों पर नजर रखना, मोबाइल चार्जिंग में सावधानी बरतना, अनधिकृत सामान न ले जाना और आपातकालीन निकास की जानकारी रखना भी आवश्यक है। जरूरत केवल नियम बनाने की नहीं, बल्कि जिम्मेदार नागरिक बनने की है। बस व रेल जैसे सभी सार्वजनिक परिवहन हमारी सामूहिक व्यवस्था है और उसकी सुरक्षा भी हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है। हम जब तक खुद सतर्क नहीं रहेंगे, तब तक व्यवस्था प्रभावी नहीं होगी। हर नागरिक सजग और संवेदनशील बने तो व्यवस्थाएं भी अधिक सुरक्षित, व्यवस्थित और भरोसेमंद बनेंगी। सामाजिक हित में सबकी जागरूकता और जिम्मेदारी ही हमारा सबसे बड़ा सुरक्षा कवच है।

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