-बिहार को भी पछाड़ा १४,१८५ पकड़े गए
सामना संवाददाता / मुंबई
देश के सबसे विकसित और प्रगतिशील राज्यों में शुमार महाराष्ट्र से एक बेहद चौंकाने और परेशान कर देने वाला खुलासा हुआ है। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के २०२४ के ताजा आंकड़ों ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया है। राजनीतिक, सामाजिक, जातीय और धार्मिक वैमनस्य के चलते होने वाली हिंसक वारदातों में महाराष्ट्र के नाबालिग सबसे आगे निकल चुके हैं। इस मामले में महाराष्ट्र ने कानून-व्यवस्था के लिए बदनाम रहने वाले बिहार को भी काफी पीछे छोड़ दिया है।
दंगों की आग में झुलस रहा है बचपन!
एनसीआरबी की रिपोर्ट के मुताबिक, साल २०२४ में पूरे देश में दंगों और हिंसक झड़पों के कुल ७४८ मामले दर्ज किए गए, जिनमें सीधे तौर पर नाबालिगों की सक्रियता साफ नजर आई। सबसे ज्यादा हैरान करने वाली बात यह है कि इन कुल मामलों में से अकेले २९७ अपराध सिर्फ महाराष्ट्र में दर्ज हुए हैं। यानी देश में नाबालिगों द्वारा किए गए दंगों के कुल मामलों का लगभग ४० फीसदी हिस्सा अकेले महाराष्ट्र से है। प्रतिशत के लिहाज से देखें तो देश के कुल बाल-अपराधों में सर्वाधिक १२.२८ फीसदी हिस्सेदारी महाराष्ट्र की है।
२० फीसदी माता-पिता के साथ रहते हैं
२०२४ के आंकड़े बताते हैं कि महाराष्ट्र पुलिस की हिरासत में रिकॉर्ड १४,१८५ बाल अपराधी आए। इस सनसनीखेज रिपोर्ट में सबसे बड़ा और आंखें खोल देने वाला खुलासा यह हुआ है कि हिरासत में लिए गए इन अपराधियों में से २० प्रतिशत से अधिक नाबालिग आरोपी अपने माता-पिता के साथ रह रहे थे। यानी जो बच्चे परिवार के साए में और माता-पिता की देखरेख में पल रहे थे, वे भी समाज के लिए एक बड़ा खतरा बनते जा रहे हैं। यह आंकड़े इस बात की ओर इशारा करते हैं कि महाराष्ट्र में किशोरों का अपराधीकरण किस कदर पैर पसार चुका है, जो न सिर्फ प्रशासन बल्कि पूरे समाज के लिए एक गंभीर खतरे की घंटी है।
चोरी, डकैती और जबरन वसूली में भी नंबर वन
नाबालिगों का यह खौफनाक चेहरा सिर्फ दंगों तक ही सीमित नहीं है। राज्य में अवैध रूप से भीड़ इकट्ठा करना, दंगे भड़काना और दो गुटों के बीच खूनी संघर्ष पैदा करने जैसे संगीन सामाजिक अपराधों के साथ-साथ चोरी, जबरन वसूली, डवैâती और दिनदहाड़े होने वाली घरफोड़ियों में भी महाराष्ट्र के बाल-अपराधियों का ग्राफ तेजी से ऊपर भागा है।
