-एमएमआरडीए के दावे फेल
शुरू होने की डेडलाइन फिर खिसकी
-तकनीकी खामियों ने रोकी सेवा
मोनोरेल सेवा को सितंबर २०२५ में तकनीकी खराबियों और सुरक्षा संबंधी चिंताओं के चलते पूरी तरह बंद करना पड़ा था। लंबे समय से घाटे और कम यात्रियों के कारण ‘सफेद हाथी’ कही जा रही यह परियोजना अब फिर देरी के कारण आलोचना झेल रही है।
जेदवी / मुंबई
करोड़ों रुपये खर्च कर बनाई गई मुंबई मोनोरेल परियोजना एक बार फिर सवालों के घेरे में है। तकनीकी खराबियों और सुरक्षा चिंताओं के कारण २० सितंबर २०२५ से बंद पड़ी मोनोरेल सेवा अब तक शुरू नहीं हो सकी है। पहले अप्रैल, फिर ७ मई २०२६ और अब मई के आखिर तक सेवा बहाल करने का दावा किया जा रहा है। लेकिन अंतिम सुरक्षा मंजूरी का इंतजार अभी भी जारी है।
करीब आठ महीने से ठप पड़ी इस सेवा ने रोजाना सफर करने वाले हजारों यात्रियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। वैकल्पिक परिवहन पर निर्भर मुंबईकर लगातार परेशानी झेलते रहे, जबकि प्रशासन सिर्फ तारीखें बदलता रहा। मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन डेवलपमेंट अथॉरिटी के अनुसार १९.५४ किलोमीटर लंबे मोनोरेल कॉरिडोर का अंतिम सुरक्षा निरीक्षण किया जा रहा है। मेट्रो रेलवे सुरक्षा आयुक्त से सुरक्षा प्रमाणपत्र मिलते ही सेवा शुरू करने की बात कही जा रही है। हालांकि सवाल यह उठ रहा है कि अगर परियोजना पूरी तरह तैयार थी तो अंतिम मंजूरी तक पहुंचने में महीनों की देरी क्यों हुई?
