मुख्यपृष्ठटॉप समाचारसमंदर में कैद जिंदगी...२०,००० नाविक बीच समुुद्र में भूख से बेहाल!

समंदर में कैद जिंदगी…२०,००० नाविक बीच समुुद्र में भूख से बेहाल!

– ३ माह से होर्मुज में फंसे हैं सैकड़ों जहाज

– खाने-पीने के सामान हो चुके हैं खत्म

एजेंसी / तेहरान

ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण को लेकर नया नक्शा जारी करने के बाद खाड़ी में फंसे हजारों नाविकों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। करीब २० हजार नाविक लगभग २ हजार जहाजों पर फंसे हुए हैं। इनमें से कई जहाज छोड़ नहीं पा रहे हैं, उन्हें पर्याप्त भोजन और पीने का पानी भी नहीं मिल रहा है और युद्ध जैसे हालात के बीच भविष्य को लेकर डर बना हुआ है।
पिछले लगभग तीन महीनों से खाड़ी में फंसे नाविक बेहद अलग-थलग जिंदगी जी रहे हैं। वे अपने कुछ साथियों के साथ छोटे रहने वाले कमरों, सामूहिक भोजन कक्षों और तेज धूप से तपते जहाजों के डेक के बीच ही सीमित होकर रह गए हैं। ईरान ने हाल ही में एक नया नक्शा जारी किया, जिसमें होर्मुज के दोनों ओर बड़े समुद्री इलाके पर अपना दावा दोहराया गया है। इससे जहाजों और उनके कीमती माल को बाहर निकालने की कोशिश कर रहे जहाज मालिकों की परेशानी और बढ़ गई है। उन्हें ईरान द्वारा बनाए गए जटिल अनुमति और भुगतान तंत्र से गुजरना पड़ रहा है।
२८ फरवरी से है बंद
ईरान ने २८ फरवरी को अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल आपूर्ति मार्गों में से एक होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया था। इसके बाद हजारों जहाज खाड़ी में फंस गए।
ईरान ने होर्मुज खोलने का दिया संकेत
अमेरिका-ईरान में शांति समझौता होने और होर्मुज स्ट्रेट के फिर से खुलने के संकेत मिल रहे हैं। ईरान ने रविवार को कहा कि होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों की संख्या ३० दिनों के भीतर युद्ध-पूर्व के स्तर पर लौट आएगी। यानी एक महीने में उसी तरह से इस समुद्री गलियारे से जहाज और तेल टैंकर गुजरने लगेंगे, जैसे २८ फरवरी से पहले गुजर रहे थे।
हाथ हिलाकर संपर्क कर रहे होर्मुज में फंसे नाविक!
कल ईरान ने संकेत दिया है कि होर्मुज जल्द ही खुल जाएगा। इससे सबसे ज्यादा राहत उन जहाजों को मिली है, जो ३ महीने से वहां फंसे हैं। इस सप्ताह एक न्यूज एजेंसी की टीम जब सऊदी अरब के तट के पास खड़े जहाजों तक सामान पहुंचाने वाली नाव से पहुंची तो वहां मौजूद एक तेल टैंकर पर मौजूद नाविक रेलिंग के पास आकर हाथ हिलाते नजर आए। बाहरी दुनिया से संपर्क का यह उनके लिए एक दुर्लभ पल था। इंटरनेशनल ट्रांसपोर्ट वर्कर्स फेडरेशन के अरब दुनिया और ईरान नेटवर्क समन्वयक मोहम्मद अर्राचेदी ने कहा कि युद्ध के कारण नाविकों की स्थिति बेहद गंभीर हो गई है। उन्होंने बताया कि कई मामलों में नाविकों को वेतन मिलने में देरी हुई, उन्हें घर वापस भेजने में मदद नहीं मिली, जरूरी सामान की कमी रही और मिसाइल तथा ड्रोन हमलों का डर लगातार बना रहा। उन्होंने कहा कि कुछ नाविक रोते हुए मदद मांग रहे थे। युद्ध शुरू होने के बाद से संगठन को खाड़ी में फंसे २ हजार से अधिक नाविकों की ओर से मदद और सलाह के लिए संपर्क किया गया है। सऊदी अरब के दम्माम बंदरगाह के पास समुद्र में सामान्य दिनों की तुलना में कहीं ज्यादा बड़े जहाज खड़े दिखाई दे रहे हैं।
तेज हवाओं के बीच जब राहत सामग्री पहुंचाने वाला जहाज एक टैंकर के पास पहुंचा तो नाविक दवाइयों और जरूरी सामान से भरे बड़े बैग जहाज पर खींचते हुए दूर से आवाज लगाकर बातचीत कर रहे थे। सिंगापुर से रवाना हुआ एक मालवाहक जहाज युद्ध शुरू होने के समय खाड़ी में फंस गया था। उसके कप्तान मोहित कोहली ने कहा कि जब उन्होंने पहली बार सुना कि होर्मुज जलडमरूमध्य बंद हो सकता है तो उन्हें यकीन ही नहीं हुआ।
‘हमले में हम निशाना न बन जाएं’
भारतीय नाविक सलमान सिद्दीकी ने पिछले महीने अपने फंसे हुए जहाज से फोन पर कहा, ‘हम यहां सिर्फ रात वैâसे कटेगी, इसकी योजना बनाते हैं और भगवान से प्रार्थना करते हैं कि किसी हमले में हम निशाना न बन जाएं।’
शांत हो गया चालक दल
जर्मनी की कंपनी के स्वामित्व वाले उनके जहाज को दम्माम के पास सुरक्षित जगह मिल गई, लेकिन युद्ध शुरू होने के एक सप्ताह बाद ही चालक दल ने मिसाइलों और ड्रोन हमलों को देखना और सुनना शुरू कर दिया। मोहित कोहली ने बताया, ‘जो चालक दल पहले हंसता-बोलता रहता था, वह अब शांत हो गया था। खाने का समय छोटा हो गया और बातचीत में भी डर साफ दिखाई देता था।’

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