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नन्हे सपनों की चमक

नन्हे सपनों की चमक,
आंखों में मुस्कान।
पापा के कंधों पे सजा,
बचपन का सम्मान॥

कोमल बांहों का ये घेरा,
प्यार भरी दीवार।
जिसमें बसता हर समय,
अपनापन-संसार॥

हंसी अधरों पर खिली,
मन में मधुर उजास।
जैसे सावन गुनगुना,
लेकर नई मिठास॥

पापा जैसे वृक्ष हों,
देते सदा ही छाँव।
उनके संग हर पल लगे,
खुशियों वाला गांव॥

नन्हे मन की चाह में,
छुपे हजारों रंग।
ममता, स्नेह और दुलार,
जीवन के सत्संग॥

-डॉ. सत्यवान सौरभ

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