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सार्वजनिक स्थानों और रक्त बैंकों के निजीकरण की साजिश नाकाम…मुंबई के लिए बड़ी जीत!.. आदित्य ठाकरे के आक्रामक रुख के बाद सत्ताधारी पीछे हटे, प्रस्ताव वापस लिए

सामना संवाददाता / मुंबई

मुंबई में रक्त बैंकों का निजीकरण करने और खुले मैदानों के आरक्षण में बदलाव कर मुंबईकरों के ‘खून और सांस’ को बेचने की साजिश शिंदे-भाजपा ने रची है, ऐसा जोरदार हमला शिवसेना नेता, युवासेनाप्रमुख और विधायक आदित्य ठाकरे ने मंगलवार को पत्रकार परिषद में किया था। उन्होंने यह भी चेतावनी दी थी कि शिवसेना इस साजिश का पूरी ताकत से विरोध करेगी। आदित्य ठाकरे के इस आक्रामक रुख के बाद सत्ताधारी पक्ष में हड़कंप मच गया। इसके बाद आखिरकार मुंबई मनपा की सुधार समिति की बुधवार की बैठक में दोनों प्रस्ताव वापस ले लिए गए। आदित्य ठाकरे ने इस संबंध में सोशल मीडिया पर पोस्ट कर इसकी जानकारी दी और इसे ‘मुंबई के लिए बड़ी जीत’ बताया।
आदित्य ठाकरे ने कहा कि मंगलवार की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद ही सुधार समिति ने यह फैसला लिया। उन्होंने यह भी बताया कि मुंबई मनपा की सुधार समिति ने इन प्रस्तावों को मंजूरी दिए बिना वापस भेज दिया है। साथ ही उन्होंने मुंबईकरों के हित में उनकी इस भूमिका का समर्थन करने वाले सभी लोगों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने साफ कहा कि विपक्ष के रूप में वे मनपा की खाली जगहों, सार्वजनिक स्कूलों और सेवाओं के निजीकरण के हर प्रयास का विरोध करते रहेंगे और उन्हें विफल करेंगे। आदित्य ठाकरे की पोस्ट में कहा गया, ‘मुंबई के लिए बड़ी जीत!
निजीकरण के हर प्रयास का विरोध
विपक्ष के रूप में हम मनपा की खाली जगहों, सार्वजनिक स्कूलों और सेवाओं के निजीकरण के हर प्रयास का विरोध करते रहेंगे और उन्हें विफल करेंगे। मुंबईकरों के हित में हमारी इस भूमिका का समर्थन करने वाले सभी लोगों का मैं आभार व्यक्त करता हूं।
बिल्डर और उद्योगपति को देने की साजिश
मनपा के रक्त बैंकों का निजीकरण और मनोरंजन मैदानों को आवासीय भूखंडों में बदलना, जिनमें एक को प्रदर्शनी केंद्र, एक को उद्योगपति के घर के लिए और एक को बिल्डर के लिए देने का प्रस्ताव था। हमने पिछले सप्ताह भी इसका विरोध किया था और आज भी स्पष्ट विरोध किया। अब ये प्रस्ताव वापस भेज दिए गए हैं, इसलिए इन्हें रद्द ही करना होगा और मनपा को सुनिश्चित करना होगा कि सार्वजनिक स्थान और सेवाएं सार्वजनिक ही रहें।’

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