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फिसलपट्टी का खेल

-डॉ. सत्यवान सौरभ

लाल-लाल फिसलपट्टी,
बच्चों की मुस्कान।
हंसते-गाते खेलते,
महके सारा जहान।।

कोई ऊपर चढ़ता है,
कोई नीचे आए।
छोटे-छोटे पांव सभी,
मस्ती खूब लुटाए।।

नन्हा मुन्ना हाथ उठाकर,
सबको राह दिखाए।
धीरे-धीरे फिसल-फिसल,
खुशियों के गीत सुनाए।।

मित्र बने सब खेल-खेल में,
न कोई तकरार।
मिलजुल कर जब खेलें बच्चे,
खिलता है संसार।।

हंसी ठिठोली, प्यारी बातें,
भोला-भाला मन।
बचपन की इन रंगीनियों से,
महके जीवन-वन।।

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