-डॉ. प्रियंका सौरभ
नन्ही-सी ये प्यारी गाड़ी,
लाल-सफेद निराली।
बैठा उसमें चंदा-मुन्ना,
सूरत भोली-भाली।।
धीरे-धीरे घूम रहा है,
पकड़े गोल स्टेयरिंग।
लगता जैसे छोटा ड्राइवर,
करता हो अब टूरिंग।।
आंखों में उत्सुकता झलके,
मन में सपने ढेर।
खेल-खेल में सीख रहा वो,
जीवन के सब फेर।।
फिसलपट्टी पास खड़ी है,
देती उसको पुकार।
हंसी-खुशी से महक रहा है,
बच्चों का संसार।।
नन्हे कदम, बड़ी उमंगें,
मासूमी की छांव।
बचपन की ये मीठी यादें,
महकाएंगी गांव।।
