मुख्यपृष्ठस्तंभफलसफा: दहेज और रिश्तों का बोझ

फलसफा: दहेज और रिश्तों का बोझ

सना खान

उस दिन शाम को जब रीमा अपने मायके लौटी, तो बारिश अभी-अभी रुकी थी। हाथ में एक छोटा बैग था, आंखों में कई रातों की थकान और चेहरे पर ऐसी चुप्पी, जिसे शायद शब्दों की आदत ही नहीं रही थी। रात तक पूरे मोहल्ले में चर्चा शुरू हो चुकी थी। कोई कह रहा था- ‘आजकल लड़कियां छोटी-छोटी बात पर घर छोड़ देती हैं।’ कोई बोला- ‘थोड़ा-बहुत तो हर शादी में चलता है।’ लेकिन बहुत कम लोग उसकी आंखों की थकान पढ़ने की कोशिश कर रहे थे। धीरे-धीरे उसकी मां से मालूम हुआ कि शादी के बाद से ही रीमा पर तानों का सिलसिला शुरू हो गया था। कभी कहा जाता-‘तुम्हारे घरवालों ने कार नहीं दी।’ कभी- ‘इतनी बड़ी शादी की, लेकिन गहने कम निकले।’ सबसे दुख की बात यह थी कि ये बातें हमेशा मुस्कुराकर कही जाती थीं, ताकि अपमान भी ‘मजाक’ लगे।
रीमा कई महीनों तक चुप रही। उसने सोचा समय के साथ सब ठीक हो जाएगा। लेकिन मांगें कम नहीं हुईं, सिर्फ तरीके बदलते गए। कभी पति नाराज रहने लगा, कभी सास रिश्तेदारों के सामने तुलना करने लगीं। एक दिन रात को रीमा ने अपने पति से पूछा- ‘अगर मेरे घरवाले सबकुछ दे भी दें, क्या उसके बाद मुझे सम्मान मिल जाएगा?’ उसका पति चुप रहा। वही चुप्पी शायद सबसे बड़ा जवाब थी। अगली सुबह रीमा अपने मायके लौट आई। लेकिन असली मुश्किल उसके बाद शुरू हुई। रिश्तेदार आने लगे। कोई समझा रहा था- ‘थोड़ा सहना सीखो, शादी कोई खेल नहीं।’
कोई बोला- ‘लड़की का असली घर ससुराल ही होता है।’ रीमा की मां सब सुनती रहीं। फिर धीरे से बोलीं- ‘अगर बेटी अपने ही घर वापस आने से डरने लगे, तो मां-बाप उसे विदा क्यों करते हैं?’ उनकी बात सुनकर कमरे में सन्नाटा छा गया।
सच तो यह है कि हमारे समाज में दहेज सिर्फ पैसों का लेन-देन नहीं है। कई बार वह तानों, तुलना, दबाव और चुप्पियों के रूप में रोज लिया जाता है। और दुख की बात यह है कि जब कोई लड़की टूटकर अपने मायके लौटती है, तो सबसे पहले उसी के संस्कारों पर सवाल उठाए जाते हैं। लोग पूछते हैं ‘वापस क्यों आ गई?’ लेकिन बहुत कम लोग ये पूछते हैं- ‘उसे वापस आने की जरूरत क्यों पड़ी?’
हर रिश्ता समझौते से चलता है, लेकिन किसी भी रिश्ते की कीमत किसी इंसान की शांति और पहचान नहीं होनी चाहिए। मायका सिर्फ विदाई तक का घर नहीं होता। अगर बेटी दुख में वापस आती है, तो उसे यह महसूस नहीं होना चाहिए कि वह बोझ बन गई है।

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